कश्मीर में इंटरनेट व अन्य प्रतिबंधों के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट कल फैसला सुनाएगा

Update: 2020-01-09 13:43 GMT

सुप्रीम कोर्ट 10 जनवरी, शुक्रवार सुबह 10.30 बजे कश्मीर क्षेत्र में लगाए गए संचार माध्यम पर नाकाबंदी, इंटरनेट बंद और अन्य निषेधात्मक उपायों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा।

27 नवंबर को जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस बीआर गवई की तीन जजों की बेंच ने कश्मीर लॉक डाउन की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के मद्देनजर लगाया गया था।

कोर्ट ने कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आज़ाद और कुछ अन्य की याचिका पर सुनवाई की।

27 नवंबर को जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस एस सुभाष रेड्डी और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल, जम्मू-कश्मीर की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल व वकील वृंदा ग्रोवर की दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इस दौरान जस्टिस रमना ने सुनवाई के दौरान एक बार फिर कहा था कि अदालत लोगों के मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगी।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हटाने के 5 अगस्त के फैसले के बाद इंटरनेट सेवाओं के साथ-साथ टेलीफोन सेवाओं व अन्य लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद समेत अन्य लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।   

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