अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के भाषणों में कोई हेट स्पीच का अपराध नहीं: वृंदा करात की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट
CPI(M) नेता वृंदा करात की उस याचिका पर, जिसमें उन्होंने 2020 में BJP नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा द्वारा कथित हेट स्पीच (नफ़रत भरे भाषण) दिए जाने का आरोप लगाया, सुप्रीम कोर्ट ने यह राय दी कि FIR दर्ज करने लायक कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह फ़ैसला सुनाया। यह फ़ैसला दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली वृंदा करात की याचिका पर आया था, जिसमें हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के उस फ़ैसले को सही ठहराया कि FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
संक्षेप में मामला
वृंदा करात की याचिका में इन दोनों नेताओं द्वारा दिए गए कई भाषणों का ज़िक्र किया गया। इनमें 27 जनवरी, 2020 को अनुराग ठाकुर द्वारा एक रैली में दिया गया वह भाषण भी शामिल था, जिसमें उन्होंने "देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को" का नारा लगाया। इसके अलावा, 27-28 जनवरी 2020 को प्रवेश वर्मा द्वारा दिए गए एक और भाषण का भी ज़िक्र किया गया। यह भाषण उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए चुनाव प्रचार करते समय और उसके बाद मीडिया को दिए गए एक इंटरव्यू में दिया था।
याचिका में आरोप लगाया गया कि इन भाषणों के ज़रिए उन प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हटाने की धमकी दी गई, जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में शाहीन बाग़ में प्रदर्शन कर रहे थे। साथ ही इन भाषणों का मक़सद मुस्लिम समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ नफ़रत और दुश्मनी फैलाना था। इसके लिए उन्हें ऐसे हमलावरों के तौर पर पेश किया गया, जो लोगों के घरों में घुसकर उनके साथ बलात्कार करेंगे और उनकी हत्या कर देंगे।
रिकॉर्ड की जांच करने के बाद जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली बेंच को हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला। हालांकि, बेंच ने हाईकोर्ट की उस टिप्पणी को ग़लत ठहराया, जिसमें कहा गया कि मजिस्ट्रेट द्वारा CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का आदेश देने से पहले 'पूर्व मंज़ूरी' (Prior Sanction) लेना ज़रूरी होता है।
यह टिप्पणी करते हुए कि 'संज्ञान लेने से पहले के चरण' (Pre-Cognizance Stage) पर पूर्व मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं होती, कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को इस सीमित हद तक रद्द किया। हालांकि, कोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री—जिसमें कथित हेट स्पीच भी शामिल हैं—की जांच करने पर BJP नेताओं के ख़िलाफ़ कोई संज्ञेय अपराध बनता हुआ नहीं पाया गया।
कोर्ट ने टिप्पणी की,
"हाईकोर्ट ने स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर यह माना है कि विचाराधीन भाषणों से किसी भी संज्ञेय अपराध का होना ज़ाहिर नहीं होता। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि ये बयान किसी विशेष समुदाय के विरुद्ध निर्देशित नहीं थे, और न ही इन्होंने हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था को भड़काया।
रिकॉर्ड पर रखे गए तथ्यों—जिनमें कथित भाषण ट्रायल कोर्ट के समक्ष 26 फरवरी, 2020 को प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट और ट्रायल कोर्ट द्वारा दर्ज किए गए कारण शामिल हैं—पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद हम इस निष्कर्ष से सहमत हैं कि कोई भी संज्ञेय अपराध नहीं बनता।"
Case Title: Brinda Karat And Anr. v. State of NCT of Delhi And Anr., Diary No. 35545/2022