NEET-PG 2025 Cut-Off Reduction : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा- मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई

Update: 2026-08-04 14:49 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने NEET-PG 2025-26 के लिए कट-ऑफ परसेंटाइल में कटौती को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई आठ हफ़्ते के लिए स्थगित की। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि उसने इन मुद्दों की जांच के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई है।

पिछली सुनवाइयों में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि वे इस बात की जांच करेंगे कि क्या NEET-PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल में भारी कटौती से पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन के स्टैंडर्ड पर असर पड़ता है।

बेंच ने सुझाव दिया कि सरकार उठाए गए मुद्दों पर विचार करने के लिए एक कमेटी बनाए। आज की सुनवाई में, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) को मिलाकर एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना दवे पाठक (नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ़ मेडिसिन की ओर से) ने अनुरोध किया कि NCISM के प्रतिनिधियों को भी एक्सपर्ट कमेटी में शामिल किया जाए।

मामले को टालते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया:

"एक्सपर्ट कमेटी अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगेगी और विस्तार से विचार करने के बाद आठ हफ़्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। एक्सपर्ट कमेटी NCISM और NCH से भी सदस्यों को शामिल कर सकती है।"

जस्टिस नरसिम्हा ने कहा,

"रिपोर्ट आने के बाद हम इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।"

यह मामला नेशनल बोर्ड ऑफ़ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज द्वारा 13 जनवरी, 2026 को जारी किए गए उस नोटिस से जुड़ा है, जिसमें NEET-PG 2025-26 की काउंसलिंग के तीसरे राउंड के लिए मिनिमम क्वालिफाइंग परसेंटाइल कट-ऑफ को कम कर दिया गया।

नोटिस के अनुसार, जनरल/EWS कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को 50वें परसेंटाइल (800 में से 276 मार्क्स) से घटाकर 7वें परसेंटाइल (103 मार्क्स) कर दिया गया। जनरल PwBD कैंडिडेट्स के लिए इसे 45वें परसेंटाइल (255 मार्क्स) से घटाकर 5वें परसेंटाइल (90 मार्क्स) कर दिया गया। SC/ST/OBC कैंडिडेट्स (इन कैटेगरी में PwBD कैंडिडेट्स सहित) के लिए इसे 40वें परसेंटाइल (235 मार्क्स) से घटाकर 0वें परसेंटाइल (माइनस 40 मार्क्स) कर दिया गया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि कट-ऑफ को घटाकर ज़ीरो और नेगेटिव मार्क्स तक लाना मनमाना है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है। साथ ही उनका कहना है कि पोस्टग्रेजुएट लेवल पर स्टैंडर्ड्स को कम करने से मरीज़ों की सुरक्षा और पब्लिक हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है।

6 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बोर्ड ऑफ़ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज़ से एक हलफ़नामा (Affidavit) दाखिल करने को कहा था, जिसमें NEET-PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ परसेंटाइल कम करने की वजह बताई जाए।

उस समय जस्टिस नरसिम्हा ने कहा था कि इस मामले में अलग-अलग तरह की बातें शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि एक तर्क यह हो सकता है कि स्टैंडर्ड्स कम किए जा रहे हैं, जबकि दूसरा तर्क यह है कि सीटें बेकार जा रही हैं, और कहीं न कहीं दोनों के बीच संतुलन बनाना ज़रूरी है।

भारत सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा कि NEET-PG का मकसद कम से कम योग्यता (Minimum Competence) को प्रमाणित करना नहीं है - जो MBBS की डिग्री से पहले ही साबित हो जाती है - बल्कि सीमित पोस्टग्रेजुएट सीटों के आवंटन के लिए मेरिट लिस्ट तैयार करना है।

सरकार ने कहा कि सभी उम्मीदवार लाइसेंस-प्राप्त MBBS डॉक्टर हैं और पोस्टग्रेजुएट शिक्षा तीन साल का एक व्यवस्थित और सुपरवाइज़्ड प्रोग्राम है। इसमें अंतिम योग्यता का आकलन MD/MS परीक्षाओं के ज़रिए किया जाता है, जिसमें उम्मीदवारों को थ्योरी और प्रैक्टिकल परीक्षाओं में अलग-अलग कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करने होते हैं।

नेशनल बोर्ड ऑफ़ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज़ ने एक अलग हलफ़नामा दाखिल किया है जिसमें कहा गया है कि क्वालिफाइंग परसेंटाइल कम करने के फ़ैसले में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। बोर्ड का कहना है कि उसकी भूमिका सिर्फ़ परीक्षा आयोजित करने और नतीजे काउंसलिंग अथॉरिटी को सौंपने तक ही सीमित है।

Case Details: HARISHARAN DEVGAN AND ORS. Versus UNION OF INDIA AND ORS|W.P.(C) No. 136/2026

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