सुप्रीम कोर्ट ने AG से कहा: केंद्र सरकार से NCLT को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कहें
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से कहा कि वह केंद्र सरकार से बात करें और यह सुनिश्चित करें कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) को जल्द-से-जल्द बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ, NCLT की मुख्य और क्षेत्रीय पीठों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है।
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि सरकार की स्टेटस रिपोर्ट NCLT के साथ साझा की गई। उन्होंने जरूरतों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक आयोजित करने का भी प्रस्ताव रखा।
हालांकि, इस मामले में पेश हुए सीनियर एडवोकेट संजीव सेन ने इस मुद्दे को सुलझाने में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बैठक तो पिछले महीने ही हो जानी चाहिए थी।
सीनियर एडवोकेट ने कहा,
"बुनियादी ढांचा चरमरा रहा है। सभी कोर्ट अपनी आधी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं!"
सीनियर एडवोकेट अरुंधति काटजू ने भी ट्रिब्यूनलों के कामकाज में आ रही दिक्कतों की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत गारंटरों से जुड़े मामले कभी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाते।
चीफ जस्टिस ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि क्या कोर्ट को बुनियादी ढांचे की जरूरतों पर NCLT अध्यक्ष की राय लेनी चाहिए।
इसके बाद पीठ ने कहा कि ट्रिब्यूनलों की जरूरतों का आकलन करने में कोर्ट की मदद करने के लिए NCLT और NCLAT के अध्यक्ष सबसे उपयुक्त व्यक्ति होंगे।
पीठ ने टिप्पणी की,
"हमें लगता है कि हमारी मदद करने के लिए NCLT और NCLAT के अध्यक्ष सबसे सही अधिकारी होंगे।"
कोर्ट ने दोनों ट्रिब्यूनलों के अध्यक्षों से विस्तृत प्रस्ताव सौंपने को कहा जिसमें उनके रोजमर्रा के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए जरूरी आवश्यकताओं का विवरण हो।
इस प्रस्ताव में जमीन और इमारतों से जुड़ी जरूरतों के साथ-साथ ट्रिब्यूनलों के प्रभावी कामकाज के लिए आवश्यक स्टाफ की मांग भी शामिल हो सकती है।
पीठ ने NCLT से यह भी विचार करने को कहा कि क्या न्यायिक रिकॉर्ड के उचित रखरखाव के लिए हर पीठ में डिप्टी रजिस्ट्रार या जॉइंट रजिस्ट्रार के स्तर के किसी अधिकारी की नियुक्ति की जानी चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया कि ऐसी सभी आवश्यकताओं की जांच की जाए और उन्हें अदालत के समक्ष रखा जाए। साथ ही, अदालत ने उम्मीद जताई कि जरूरी जानकारी चार सप्ताह के भीतर सौंप दी जाएगी।
इस बीच, अटॉर्नी जनरल से आग्रह किया गया कि वे केंद्र सरकार पर जोर दें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि NCLT और NCLAT को जल्द से जल्द सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।