सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के प्रशासन को निर्देश दिया कि तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को दौरे से एक दिन पहले सूचना देने पर प्रोटोकॉल के अनुसार सर्किट हाउस में ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

कोर्ट ने नदिया के जिला मजिस्ट्रेट के उस पत्र पर भी सवाल उठाए, जिसमें महुआ मोइत्रा और जिले के अन्य विधायकों से सर्किट हाउस में ठहरने के लिए तीन से चार दिन पहले सूचना देने को कहा गया था।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि पत्र का लहजा “प्रतिशोधात्मक प्रतीत होता है” और उसमें निर्धारित समयसीमा को संशोधित कर एक दिन पहले सूचना देने का निर्देश दिया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिका में अगस्त 2026 में कृष्णानगर सर्किट हाउस से कथित तौर पर देर रात उन्हें बाहर जाने के लिए कहे जाने और उनके निर्वाचन क्षेत्र में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत परियोजनाओं को लागू करने में जिला प्रशासन की कथित असहयोगपूर्ण भूमिका का मुद्दा उठाया गया।

राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संबंधित समय पर सर्किट हाउस में रखरखाव का काम चल रहा था और वहां पानी से आयरन हटाने वाला संयंत्र लगाया जा रहा था।

उनके अनुसार, महुआ मोइत्रा ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि अधिकारियों के ट्रांजिट आवास के लिए इस्तेमाल किए जा रहे दो कमरों को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति को कमरा आवंटित नहीं किया गया।

मेहता ने कहा कि महुआ मोइत्रा को शिष्टाचारपूर्वक एक कमरे तक पहुंचाया गया और बाद में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने उन्हें दूसरे सरकारी गेस्ट हाउस में स्थानांतरित होने के संबंध में फोन किया।

उन्होंने इस आरोप से इनकार किया कि किसी अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से उनके पास जाकर परिसर खाली करने की मांग की थी।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि प्रशासन ने उनके प्रति सभी आवश्यक शिष्टाचार बरते है।

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