कॉमेडियन कुणाल कामरा ने विधायी विशेषाधिकारों की सीमा और नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से उसके संबंध से जुड़े लंबित मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अनुमति मांगी। यह मामला सात जजों की संविधान पीठ के समक्ष लंबित है और 6 अक्टूबर 2026 से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

कामरा ने अपनी अर्जी में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 194(3) के तहत विधायी विशेषाधिकार और अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संबंध का सवाल उनके खिलाफ महाराष्ट्र विधानमंडल में चल रही विशेषाधिकार कार्यवाही पर सीधे असर डालता है।

अर्जी में कहा गया कि विधायी विशेषाधिकार का इस्तेमाल नागरिकों की अभिव्यक्ति को दबाने के लिए नहीं किया जा सकता। कामरा का कहना है कि विधायी विशेषाधिकार और नागरिक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच टकराव होने पर संवैधानिक प्रावधानों की ऐसी व्याख्या होनी चाहिए, जो दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करे।

सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की पीठ जिस मामले की सुनवाई करने वाली है, वह एन. रवि बनाम तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष मामले से जुड़ा है। इसमें मुख्य सवाल यह है कि राज्य विधानमंडल के विशेषाधिकार और नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संवैधानिक संबंध क्या है। मामला अनुच्छेद 194(3), अनुच्छेद 19(1)(a) और अनुच्छेद 21 की व्याख्या से संबंधित है। 

कामरा ने कहा कि वह इस मामले से सीधे प्रभावित हैं, क्योंकि महाराष्ट्र विधानमंडल में उनके खिलाफ विशेषाधिकार की कार्यवाही लंबित है। यह कार्यवाही उनके हास्य कार्यक्रम 'नया भारत' के उस हिस्से से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने 2022 में महाराष्ट्र में हुए राजनीतिक घटनाक्रम और एकनाथ शिंदे के राजनीतिक पाला बदलने पर टिप्पणी की थी।

कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के इस्तीफे, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में सरकार बनने और शिवसेना में विभाजन से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर भी टिप्पणी की गई।

वीडियो सामने आने के बाद विधायक मुर्जी कांजी पटेल ने खार पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज हुई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2025 के आदेश में कामरा को याचिका लंबित रहने के दौरान गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था। कामरा की अर्जी के अनुसार, इस मामले में अभी आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ और हाईकोर्ट में कार्यवाही लंबित है।

इसके अलावा महाराष्ट्र विधानमंडल में उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही भी शुरू की गई। विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर की शिकायत के आधार पर जुलाई 2025 में उन्हें विशेषाधिकार और अवमानना मामले की सूचना दी गई। इसमें आरोप लगाया गया कि कामरा के व्यंग्यात्मक गीत से एकनाथ शिंदे का व्यक्तिगत रूप से अपमान हुआ और इससे उनके विशेषाधिकार का उल्लंघन हुआ।

कामरा ने विशेषाधिकार समिति के समक्ष कहा कि उनके कार्यक्रम से महाराष्ट्र विधानमंडल के कामकाज में कोई हस्तक्षेप नहीं हुआ और उनकी प्रस्तुति संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल थी।

अर्जी के अनुसार, विशेषाधिकार समिति ने 9 अप्रैल 2026 को कामरा की सुनवाई की। उन्होंने लिखित दलीलें और संबंधित कानूनी फैसले भी प्रस्तुत किए। विशेषाधिकार कार्यवाही अभी लंबित है।

कामरा ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उनका मामला केवल उनके व्यक्तिगत अधिकारों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह सवाल उन सभी नागरिकों से जुड़ा है, जो निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के कार्यों पर टिप्पणी करना चाहते हैं। उनका कहना है कि इस तरह की कार्यवाही से नागरिकों के बोलने पर भय का माहौल पैदा हो सकता है।

कामरा ने इसी आधार पर सात जजों की पीठ के समक्ष लंबित मामले में हस्तक्षेप करने और विचाराधीन संवैधानिक सवालों पर अपनी दलीलें रखने की अनुमति मांगी।

सुप्रीम कोर्ट के उपलब्ध वाद विवरण के अनुसार इस मामले की सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित है।

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