सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) न दिए जाने से जुड़े पंजाब के मुख्य सचिव के खिलाफ एक मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कल टिप्पणी की कि सरकारी कर्मचारी एक "विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग" (Privileged Class) हैं। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए उनकी भर्ती कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) के आधार पर होनी चाहिए।

जज ने कहा,

"अब से सरकारी कर्मचारियों की भर्ती कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर होनी चाहिए। तभी उनकी जवाबदेही तय हो पाएगी। वे दिन भर में बस तीन पेज टाइप करते हैं। उन्हें न्यायिक विभाग में काम नहीं करना होता। वे हाई कोर्ट या जिला अदालतों में भर्ती होते हैं, लेकिन बाद में सचिवालय चले जाते हैं। और वहां उन्हें दिन भर में बस 3 पेज टाइप करने होते हैं!"

जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच सरकारी कर्मचारियों द्वारा राज्य के खिलाफ किए गए दावों से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट के सामने, जब राज्य ने दावा किया कि उसके पास जरूरी भुगतान करने के लिए पर्याप्त फंड नहीं है, तो हाई कोर्ट ने गौर किया कि राज्य सरकार मुफ्त की योजनाओं (Freebies) आदि पर खर्च कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट में भी प्रतिवादियों (सरकारी कर्मचारियों) ने पंजाब की योजनाओं और मुफ्त उपहारों की ओर इशारा करते हुए ऐसा ही तर्क दिया। इस संदर्भ में, जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की कि प्रतिवादी (राज्य के खिलाफ दावा करने वाले सरकारी कर्मचारी) एक विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग हैं, जबकि मुफ्त की योजनाएं समाज के वंचित वर्गों के लिए होती हैं।

जब वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत (प्रतिवादियों की ओर से) ने कहा कि कुछ सरकारी कर्मचारी बहुत मेहनती भी होते हैं और सभी को एक ही तराजू में नहीं तौला जा सकता, तो जज ने पलटकर कहा कि अगर सरकारी कर्मचारी इतने ही ईमानदार होते, तो देश में मुकदमों की संख्या कम हो जाती।

कामत ने जवाब दिया,

"राज्य को एक 'आदर्श नियोक्ता' (Model Employer) की तरह काम करना चाहिए।"

सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा,

"सरकारी कर्मचारियों की मौत के बाद भी उनके परिवारों को पेंशन मिल रही है। आखिर यह क्या है? पेंशन जारी करने पर आपके अपने ही लोग आपत्ति जता रहे हैं। हर जगह लालफीताशाही (Red-Tapism) और भ्रष्टाचार (Black-Tapism) है। सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही कहाँ है?"

बेंच ने मुख्य सचिव के खिलाफ चल रही अवमानना ​​(Contempt) की कार्यवाही पर रोक लगा दी और कहा कि वह इस तरह के "दबाव बनाने के तरीकों" (Arm-Twisting) को सही नहीं मानती।

जस्टिस ने टिप्पणी की,

"आप इस तरह मुख्य सचिव को तलब नहीं कर सकते। आपको पैसे कौन देगा?"

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