CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बीच CJI सूर्यकांत ने कहा: 'हर वकील को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार'
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि हर वकील को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का अधिकार है। वह दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान वकीलों की हिरासत और कथित पुलिस ज्यादतियों से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे हैं।
सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने CJI की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने यह मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान वकीलों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई और BNSS की धारा 163 के तहत कोई आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा कि बेंच को पुलिस से संयम बरतने के लिए कहना चाहिए।
शंकरनारायणन ने कहा:
"यह मामला विरोध प्रदर्शनों के संबंध में है और धारा 163 का कोई आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। हमने एक धारा की वैधता को भी चुनौती दी है। ऐसे समय में जब हमारे सीनियर एडवोकेट्स को सड़कों पर घसीटा जा रहा है - मिस्टर फरासत को शारीरिक रूप से सड़कों पर घसीटा गया। यह बहुत अनुचित है। ऐसा नहीं होना चाहिए। माननीय जजों ने कहा है कि हमें संयम बरतने की कोशिश करनी चाहिए। मैं उम्मीद करता हूं कि माननीय जज पुलिस से भी यही बात कहें; अब तक इस बेंच की ओर से ऐसा नहीं कहा गया। मुझे उम्मीद है कि ऐसा होगा। क्योंकि पुलिस... पुलिस जो ज्यादतियां होने दे रही है... गुंडे घूम रहे हैं और बच्चों पर हमला कर रहे हैं।"
उन्होंने अनुरोध किया कि इस मामले को CEC विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले के साथ कल (मंगलवार) सुना जाए।
इसके बाद CJI ने कहा:
"अभी, मैं कुछ नहीं कहना चाहता... मैं बस इतना अनुरोध कर रहा हूं, हम सुप्रीम कोर्ट को... नहीं बनने देंगे, लेकिन हर वकील, बार के हर सदस्य को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनने का अधिकार है, जहां भी इसके लिए निर्धारित स्थान हैं..."
सीनियर वकील ने कहा कि कुछ निजी गुंडे प्रदर्शनकारियों पर हमला कर रहे हैं और पुलिस उन्हें रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा,
"उन्होंने बच्चों के सिर पर लाठियां मारीं और गर्व से कह रहे हैं कि हमने ऐसा किया। इसके वीडियो भी हैं, जो मैं कल दिखाऊंगा। और हमसे संयम बरतने को कहा जा रहा है... मैं हैरान हूं, मैंने कभी किसी सीनियर वकील को सड़कों पर घसीटे जाते नहीं देखा। दो और लोगों - मिस्टर दिनेश द्विवेदी और सुश्री उत्तरा बब्बर - को बसों में हिरासत में लिया गया। यह बहुत दुखद है। कभी न कभी तो बेंच को बार और देश के नागरिकों के बचाव में आना ही होगा और पुलिस को कड़ा संदेश देना होगा। पुलिस को लगता है कि वे कुछ भी करके बच निकलेंगे।"
CJI इस बात पर सहमत हुए कि मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाएगा।
रविवार को हुई एक विशेष सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि निहत्थे नागरिकों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में न लिया जाए, और वकीलों, पत्रकारों व अन्य पेशेवरों को उनके पेशेवर काम करने से न रोका जाए।