सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं और कैदियों को हथकड़ी लगाने की चिंताओं को उठाने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया। 

याचिकाकर्ता के लिए पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र शर्मा से शुरुआत में सीजेआई एस ए बोबडे ने पूछा,

आप इसके साथ कहां जा रहे हैं? आप अतिरिक्त-न्यायिक हत्या को कैसे रोक सकते हैं? उन्हें नहीं होना चाहिए, लेकिन आप उन्हें कैसे रोकेंगे?" 

शर्मा ने सिटीजन्स फॉर डेमोक्रेसी बनाम असम राज्य मामले में फैसले का हवाला दिया,  

"2014 में, आपने कहा था कि एक अतिरिक्त-न्यायिक हत्या के बाद जांच होनी चाहिए ... जब एक अभियुक्त रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट के सामने होता है, तो वह खुद को और अपने वकील की आशंकाओं को जानता है, जिसे उसे मजिस्ट्रेट को बताना चाहिए।

मजिस्ट्रेट को वो ही रिकॉर्ड करना चाहिए ... 1995 में, इस अदालत ने कहा कि रस्सी से बांधने या हथकड़ी लगाने के लिए एक कैदी को एक सामान्य नियम के रूप में मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन केवल अपवाद के रूप में  ये हो।"

सीजेआई ने कहा, 

"लेकिन कुछ आरोपी खतरनाक हैं। उन्हें  हथकड़ी लगानी चाहिए।"

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा,

"हां, उन्हें होना चाहिए! इस तरह की आशंकाओं को बताने के लिए अभियुक्त सबसे अच्छा व्यक्ति है! लेकिन मजिस्ट्रेट को व्यक्ति की इस आशंका को दर्ज करना चाहिए! मजिस्ट्रेट को पूछना चाहिए कि क्या आप हथकड़ी लगाना चाहते हैं?"

सीजेआई ने टिप्पणी की कि

"नहीं, नहीं, नहीं, कौन सा आरोपी 'हां' कहेगा? यदि आरोपी पुलिस के साथ मारपीट करने का इरादा रखता है, तो वह 'नहीं' कहने के लिए बाध्य है! वह मूर्ख व्यक्ति होगा जो कहेगा ' मुझे हथकड़ी' लगा दो! लोग पुलिस को मारते हैं। , लोग  जेल वार्डन को भी मार डालते हैं।"

"हां लेकिन उनसे कानून के अनुसार निपटा जाना चाहिए।" वकील ने तर्क दिया।

सीजेआई ने याचिका खारिज करते हुए कहा,  

"क्षमा करें, हम इसकी सुनवाई नहीं करेंगे।"

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