ऑपरेशन सिंदूर पोस्ट मामला: प्रोफेसर महमूदाबाद को हरियाणा सरकार से राहत, सुप्रीम कोर्ट ने केस खत्म किया
सुप्रीम कोर्ट के संकेत के बाद हरियाणा सरकार ने अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इनकार किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही समाप्त की।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ के सामने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने बताया कि राज्य सरकार ने अभियोजन की अनुमति देने से मना कर दिया। इस पर अदालत ने आपराधिक कार्यवाही रद्द की।
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि प्रोफेसर को चेतावनी दी जा सकती है ताकि वह भविष्य में ऐसी गतिविधियों में शामिल न हों। प्रोफेसर की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा और एडवोकेट निजाम पाशा पेश हुए।
यह मामला प्रोफेसर द्वारा सोशल मीडिया पर ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े पोस्ट को लेकर दर्ज FIR से जुड़ा था। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, समाज में असंतोष फैलाने और राष्ट्रीय संप्रभुता को खतरे में डालने जैसे आरोप लगाए गए थे।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मामले पर पुनर्विचार करने और अभियोजन की अनुमति न देकर केस समाप्त करने पर विचार करने को कहा था। प्रोफेसर ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
पिछले वर्ष मई में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी हालांकि अदालत ने उनके सोशल मीडिया पोस्ट की मौखिक रूप से आलोचना भी की थी। साथ ही पोस्ट के वास्तविक अर्थ और उसमें किसी आपराधिक तत्व की जांच के लिए एक विशेष जांच दल भी गठित किया गया था।
मामले का निपटारा करते हुए अदालत ने कहा,
“हमें यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि याचिकाकर्ता, जो एक अत्यंत विद्वान प्रोफेसर हैं, भविष्य में विवेकपूर्ण तरीके से आचरण नहीं करेंगे।"
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“कभी-कभी इस तरह लिखना कि पंक्तियों के बीच पढ़ा जा सके अधिक समस्याएं पैदा कर देता है। कई बार परिस्थितियां संवेदनशील होती हैं और हम सभी को सावधानी बरतनी चाहिए।”