बाबरी विध्वंस केस की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश ने पुलिस सुरक्षा मांगी, सुप्रीम कोर्ट ने दिए उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश

Update: 2019-08-23 07:16 GMT

बाबरी मस्जिद विध्वंस षड्यंत्र मामले में सुनवाई कर रहे सीबीआई कोर्ट लखनऊ के विशेष न्यायाधीश एस के यादव ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर पुलिस सुरक्षा की मांग की है।

शुक्रवार को सुप्रीमकोर्ट में अनुरोध को ध्यान में रखते हुए जस्टिस आर एफ नरीमन और सूर्य कांत की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को दो सप्ताह में इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि जज द्वारा किए जा रहे कार्य की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के लिए न्यायाधीश की मांग वाजिब है।

सीबीआई न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जुलाई में दिए गए निर्देश के अनुसार अप्रैल 2020 तक कार्यवाही पूरी करके फैसला सुनाना है। मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश 30 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले थे लेकिन उनके कार्यकाल को इस मामले का फैसला सुनाए जाने तक विस्तार देने का आदेश दिया गया था।

भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह आदि 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए साजिश के आरोपों का सामना कर रहे हैं।

19 अप्रैल, 2017 को जस्टिस पीसी घोष और आरएफ नरीमन की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए डिस्चार्ज के खिलाफ सीबीआई द्वारा दायर अपील की अनुमति देकर आडवाणी, जोशी, उमा भारती और 13 अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ साजिश के आरोपों को बहाल किया था।

संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए पीठ ने रायबरेली मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित अलग मुकदमे को भी स्थानांतरित कर दिया और लखनऊ सीबीआई कोर्ट में आपराधिक कार्यवाही के साथ इसे क्लब कर दिया।

शीर्ष अदालत ने मामले में दिन-प्रतिदिन सुनवाई करके दो साल में मुकदमे को समाप्त करने का आदेश दिया। पीठ ने कहा कि आरोपी कल्याण सिंह में से एक राजस्थान के राज्यपाल होने के नाते संवैधानिक प्रतिरक्षा प्राप्त करेंगे, लेकिन जैसे ही वह पद छोड़ते हैं, उनके खिलाफ अतिरिक्त आरोप दायर किए जाएंगे। कल्याण सिंह सितंबर में राज्यपाल का कार्यकाल पूरा करेंगे। 

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