आसाराम की अस्थायी जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस, 27 अक्टूबर को पैरोल खत्म होने के बाद नवंबर में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (14 अक्टूबर) को स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की उस याचिका पर सुनवाई बंद कर दी, जिसमें उसने 2013 के गांधीनगर बलात्कार मामले में अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए अस्थायी जमानत देने से इनकार करने वाले गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। आसाराम की ओर से याचिका वापस लेने के बाद अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए नवंबर में सूचीबद्ध किया।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ को बताया गया कि आसाराम राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा एक अन्य 2013 जोधपुर नाबालिग बलात्कार मामले में दी गई 20 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर है।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि पैरोल की अवधि समाप्त होने और आसाराम के जेल में आत्मसमर्पण करने के बाद मामले में आगे सुनवाई की जाएगी। उसकी पैरोल 27 अक्टूबर को समाप्त हो रही है।
क्या था मामला?
आसाराम को वर्ष 2023 में गांधीनगर की सत्र अदालत ने 2001 से 2006 के बीच अहमदाबाद स्थित अपने आश्रम में एक शिष्या के साथ बार-बार बलात्कार करने के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस मामले में 2013 में FIR दर्ज की गई थी। गुजरात हाईकोर्ट में उसकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित है।
इसी मामले में आसाराम ने अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए अस्थायी जमानत मांगी थी, लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
दूसरी ओर, वर्ष 2013 में जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में भी आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। राजस्थान हाईकोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है। इसी मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने उसे 20 दिन की पैरोल दी है।
सुनवाई के दौरान क्या दलीलें दी गईं?
आसाराम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत को बताया कि राजस्थान वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट नोटिस जारी कर चुका है।
पीड़िता की ओर से पेश वकील ने बताया कि राजस्थान मामले में पहले सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति पर एम्स से रिपोर्ट मांगी थी। यह रिपोर्ट उस समय मांगी गई थी, जब आसाराम ने चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की थी।
पीड़िता के वकील के अनुसार, चिकित्सा रिपोर्ट में आसाराम की पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख था। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत ने स्वास्थ्य बिगड़ने की स्थिति में ही उसे दोबारा राहत के लिए संपर्क करने की अनुमति दी थी
राजस्थान और गुजरात सरकारों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आसाराम दोनों राज्यों में बलात्कार के मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि आसाराम ने पहले स्वास्थ्य आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट में पैरोल मांगी थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। बाद में राजस्थान हाईकोर्ट से उसे 20 दिन की पैरोल मिल गई।
हालांकि, गांधीनगर मामले में दोषसिद्धि के कारण उसे रिहा नहीं किया जा सका। इसके बाद उसने अपनी बीमार पत्नी से मिलने के आधार पर गुजरात हाईकोर्ट से अस्थायी जमानत मांगी, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली।
सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट के पैरोल संबंधी आदेश के अनुपालन को लेकर आसाराम ने अदालत का रुख किया था। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को अपने आदेश का पालन करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आसाराम के जेल लौटने के बाद दोषसिद्धि के खिलाफ उसकी अपील पर आगे सुनवाई की जाएगी।
जस्टिस पारदीवाला ने मौखिक टिप्पणी की कि अदालत मामले में कानून के एक सीमित प्रश्न पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को यह समझाना होगा कि कथित चूक के कारण उसकी पूरी दोषसिद्धि किस तरह प्रभावित होती है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि आसाराम को उन अन्य आरोपों में दोषी ठहराया जा सकता है, जिनसे उसे शुरुआत में बरी किया गया था, लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत दोषसिद्धि नहीं हो सकती।
दवे ने यह भी दावा किया कि आसाराम को पिछली रात दिल का दौरा पड़ा और उसे ICU में भर्ती कराया गया। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मुकदमे के दौरान तीन प्रमुख गवाहों की हत्या हुई थी।
नवंबर में होगी आगे की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि आसाराम फिलहाल पैरोल पर है और 27 अक्टूबर को इसकी अवधि समाप्त होने के बाद उसे आत्मसमर्पण करना होगा। इसके बाद मामले की आगे सुनवाई नवंबर में की जाएगी।
पीठ ने रजिस्ट्री को ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड की डिजिटल और भौतिक प्रतियां मंगाने का निर्देश भी दिया। रिकॉर्ड का एक-एक सेट आसाराम, राज्य सरकार और पीड़िता को उपलब्ध कराया जाएगा।
इस तरह, सुप्रीम कोर्ट में पत्नी से मिलने के लिए अस्थायी जमानत की मांग वाली याचिका वापस ले ली गई, जबकि दोषसिद्धि के खिलाफ लंबित कानूनी चुनौती पर आगे की सुनवाई नवंबर में होगी।