इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आजम खान का चुनाव रद्द करने की जयाप्रदा की याचिका खारिज की, अमर सिंह ने की पैरवी

Update: 2019-06-15 13:26 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अभिनेत्री और पूर्व सांसद जयाप्रदा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के रामपुर से सासंद निर्वाचित हुए समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां की लोकसभा सदस्यता को चुनौती दी गई थी।

"चुनाव याचिका के तौर पर दाखिल की जानी चाहिए याचिका"
शुक्रवार को जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस एन. के. जौहरी की हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि रामपुर इस पीठ के न्यायिक अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार का है। इसलिए क्षेत्र के आधार पर इसे खारिज किया जाता है। वहीं पीठ ने यह भी कहा कि ये याचिका रिट के तौर पर नहीं बल्कि चुनाव याचिका के तौर पर दाखिल की जानी चाहिए।

राज्यसभा सांसद अमर सिंह स्वयं वकील के तौर पर हुए पेश
मामले की खास बात यह है कि जयाप्रदा के लिए इस मामले की पैरवी के लिए वकील के तौर पर खुद राज्यसभा सदस्य अमर सिंह कोर्ट पहुंचे थे। हालांकि कई साल पहले ही उन्होंने बार की सदस्यता ली थी लेकिन वो शायद पहली बार बतौर वकील कोर्ट पहुंचे।

आजम खान के लाभ के 2 पर होने का आरोप
दरअसल जयाप्रदा ने अपनी याचिका में कहा था कि आजम खान रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय के चांसलर हैं। अब वो रामपुर से सांसद भी चुने गए हैं। ऐसे में वह लाभ के 2 पद पर हैं। इसलिए आजम खां का निर्वाचन रद्द करते हुए उन्हें (जयाप्रदा) यहां का सांसद घोषित किया जाए।

"संसद सदस्य का पदभार संभालने का कानूनी आधार क्या१"
वकील अशोक पांडेय के माध्यम से दाखिल की गई इस याचिका में कोर्ट से अनुरोध किया गया कि आजम खां से यह स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए कि मौलाना जौहर अली यूनिवर्सिटी के कुलपति होने के नाते वो जब लाभ के पद पर हैं तो किस कानूनी अधिकार से वो संसद सदस्य का पदभार संभाले हुए हैं।

इसके साथ ही याचिका में यह दलील दी गई है कि यह तय नियम है कि संसद सदस्य किसी भी दूसरे लाभ के पद पर नहीं रह सकता। ऐसे में इसी आधार पर आजम खां का निर्वाचन रद्द कर याचिकाकर्ता को रामपुर लोकसभा सीट की सांसद घोषित किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में रामपुर संसदीय सीट से गठबंधन से सपा प्रत्याशी मोहम्मद आजम खां ने भाजपा की उम्मीदवार जयाप्रदा को हराया है।

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