बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस श्रुति हासन से जुड़ी ऐसी आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को दिया, जो उनके सम्मान और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करती है।

जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि श्रुति हासन ने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रथम दृष्टया बेहद मजबूत मामला पेश किया।

कोर्ट ने यह आदेश श्रुति हासन की ओर से दायर कमर्शियल मुकदमे की सुनवाई के दौरान दिया। मुकदमा 'द पायनियर' का प्रकाशन करने वाली कंपनी CMYK प्रिंटेक से अलग मामले में विभिन्न संस्थाओं और अज्ञात लोगों के खिलाफ दायर किया गया। श्रुति हासन ने अपने नाम, तस्वीर, समानता और आवाज के कथित अनधिकृत इस्तेमाल के लिए 15 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की।

याचिका में आरोप लगाया गया कि उनके नाम और समानता वाली अनधिकृत सामग्री ऑनलाइन बेची जा रही है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार नकली सामग्री भी प्रसारित की जा रही है।

शिकायत में विशेष रूप से आरोप लगाया गया कि अज्ञात लोगों ने AI और नकली वीडियो तकनीक का इस्तेमाल कर श्रुति हासन के चेहरे को अश्लील और यौन सामग्री वाले वीडियो तथा तस्वीरों पर लगा दिया। एक्ट्रेस का कहना है कि यह सामग्री उनकी अनुमति के बिना तैयार और प्रसारित की गई तथा इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और उन्हें उपहास का सामना करना पड़ा।

मुकदमे में कुल 18 पक्षकार बनाए गए। इनमें उनकी तस्वीर और नाम वाली सामग्री बेचने वाले, कलाकारों की बुकिंग से जुड़े मंच, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संवाद सेवाएं देने वाले, सोशल मीडिया कंपनियां, ऑनलाइन खरीद-बिक्री मंच, सरकारी प्राधिकरण और अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं।

श्रुति हासन की ओर से दलील दी गई कि किसी व्यक्ति के नाम, हस्ताक्षर, आवाज, तस्वीर और पहचान से जुड़े अन्य पहलुओं का व्यावसायिक इस्तेमाल या उनकी नकल उनकी अनुमति के बिना नहीं की जा सकती।

उन्होंने कॉपीराइट कानून की संबंधित धाराओं के तहत कलाकार के नैतिक अधिकारों का भी हवाला दिया। उनका आरोप है कि उनकी फिल्मों में किए गए अभिनय के अंश निकालकर उन्हें अलग तरीके से इस्तेमाल किया गया और उनके चलचित्रों से बनाए गए छोटे वीडियो तथा नकली वीडियो इस तरह प्रसारित किए गए जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची।

श्रुति हासन ने व्यक्तित्व और प्रचार से जुड़े अपने अधिकारों के उल्लंघन पर स्थायी रोक लगाने के साथ-साथ आपत्तिजनक सामग्री सौंपने, उससे हुई कमाई का हिसाब देने और 15 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की।

उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य मध्यस्थ प्लेटफॉर्म्स से उन अज्ञात लोगों की पहचान के लिए उनके खातों और ग्राहकों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश देने की भी मांग की, ताकि उन्हें मुकदमे में पक्षकार बनाया जा सके।

अलग कार्यवाही में जस्टिस अभय आहूजा ने श्रुति हासन को पत्र पेटेंट की धारा 12 के तहत हाईकोर्ट के वाणिज्यिक प्रभाग में मुकदमा दायर करने की अनुमति दी। यह अनुमति इसलिए जरूरी है, क्योंकि मुकदमे के कारण का केवल एक हिस्सा हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार में उत्पन्न होने का दावा किया गया।

मौजूदा आदेश में हाईकोर्ट ने श्रुति हासन के व्यक्तित्व और गरिमा से जुड़े अधिकारों के संरक्षण को लेकर अंतरिम स्तर पर हस्तक्षेप किया और संबंधित मंचों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया।

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