बॉम्बे हाईकोर्ट ने वकीलों की सुरक्षा के लिए व्यापक कानून बनाने की तत्काल जरूरत पर जोर दिया।

हाईकोर्ट ने एक वकील पर हमला करने और उसे आपराधिक मुकदमे में पैरवी करने से रोकने की कोशिश करने के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

जस्टिस माधव जामदार ने नासिक जिले के निवासी किरण कहांडल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। आरोप है कि किरण और उसके कुछ सहयोगियों ने एक वकील के साथ मारपीट की, उसके कार्यालय में तोड़फोड़ की और कंप्यूटर सहित अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया। यह घटना इसलिए हुई, क्योंकि वकील, डेट परिवार की ओर से कहांडल परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में पैरवी करने वाले थे।

मामले के अनुसार शिकायतकर्ता वकील डेट परिवार की ओर से कहांडल परिवार के सदस्यों के खिलाफ चल रहे दीवानी और आपराधिक मामलों में पेश हो रहे थे।

आरोप है कि कहांडल परिवार के सदस्यों ने वकील पर मुकदमे से हटने का दबाव बनाया। जब वकील ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो उनके साथ मारपीट की गई और उनके कार्यालय में तोड़फोड़ की गई।

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि किसी पक्षकार की ओर से अदालत में पैरवी करने के कारण वकील पर हमला करना और उसे मुकदमे से हटने के लिए मजबूर करना न्यायिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

जस्टिस जामदार ने कहा,

“यह बेहद गंभीर मामला है जिसमें एक वकील जो किसी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहा है और अदालत का अधिकारी है उस पर मुकदमे से अपनी पैरवी वापस लेने का दबाव बनाया गया। जब उसने ऐसा करने से इनकार किया तो उसके साथ मारपीट की गई।”

अदालत ने मामले के आरोपपत्र में शामिल एक सह-आरोपी के बयान का भी उल्लेख किया। पीठ के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह बयान आरोपी किरण कहांडल की कथित भूमिका की ओर संकेत करता है। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता वकील को धमकाने और उन पर हमला करने के आरोप गंभीर हैं।

जस्टिस जामदार ने इस मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत के अधिकारियों के रूप में काम करने वाले वकीलों को पर्याप्त सुरक्षा देने के लिए व्यापक कानून बनाने की तत्काल आवश्यकता है।

अदालत ने कहा कि वकीलों को केवल अपने पेशेवर कर्तव्य निभाने के कारण धमकियों और हमलों का सामना नहीं करना चाहिए।

इन टिप्पणियों के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट ने किरण कहांडल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।

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