बिना नोटिस तोड़फोड़ केवल आपात स्थिति में ही संभव, सामान्य नियम है सुनवाई का अधिकार: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

Update: 2026-05-04 07:12 GMT

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि निजी संपत्ति को गिराने से पहले नगर निकायों के लिए सामान्य नियम के रूप में विधिसम्मत प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना नोटिस और सुनवाई के ध्वस्तीकरण केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही किया जा सकता है।

जस्टिस गन्नामनेनी रामकृष्ण प्रसाद ने यह टिप्पणी याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें याचिकाकर्ता ने सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए अपनी दो दुकानों को गिराए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि वह लंबे समय से संबंधित भूमि पर कब्जे में है, वहां निर्मित दुकानों पर नियमित रूप से संपत्ति कर और बिजली बिल का भुगतान करता रहा है। इसके बावजूद नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत उसकी दुकानों को ध्वस्तीकरण के लिए चिन्हित कर दिया, जबकि न तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई गई और न ही मुआवजा दिया गया।

नगर निगम ने अदालत में दलील दी कि दुकानें सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण हैं और कानून के तहत ऐसे अतिक्रमण हटाने के लिए पूर्व नोटिस आवश्यक नहीं है। निगम ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को मौखिक रूप से ढांचा हटाने को कहा गया।

हालांकि, हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को प्रभावित करने वाली राज्य कार्रवाई से पहले सुनवाई का अवसर देना सामान्य नियम है और इससे केवल असाधारण या अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही छूट दी जा सकती है।

अदालत ने कहा,

“अतिक्रमण हटाने की शक्ति का प्रयोग केवल उन्हीं मामलों में बिना नोटिस किया जा सकता है, जहां अत्यधिक तात्कालिकता हो हालिया अतिक्रमण हो, या अतिक्रमणकारी दोबारा कब्जा करने का प्रयास कर रहा हो। यह अपवाद है सामान्य नियम नहीं।”

हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता लंबे समय से दुकानों के कब्जे में है और स्वामित्व का दावा पंजीकृत दस्तावेजों के आधार पर कर रहा है। ऐसे में अधिकारियों पर यह दायित्व था कि वे नोटिस जारी करें, उचित सुनवाई दें और विधि अनुसार कारणयुक्त आदेश पारित करें।

अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए नगर निगम को निर्देश दिया कि वह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करे याचिकाकर्ता को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर दे और उसके बाद ही कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करे।

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