इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुल्तानपुर के ज़िला जज को निर्देश दिया कि वह सुल्तानपुर बार एसोसिएशन चुनाव की गिनती के दौरान बैलेट बॉक्स लूटने में शामिल वकीलों की पहचान करने के लिए जांच करें। इस घटना ने चुनाव प्रक्रिया में बाधा डाली थी।

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने ज़िला जज को निर्देश दिया कि वह CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध सबूतों की जांच करें और उन लोगों या वकीलों की पहचान करें, जो इस घटना में शामिल हो सकते हैं।

कोर्ट ने सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) को भी निर्देश दिया कि वह इस घटना के संबंध में दर्ज FIR की जांच की निगरानी करें और स्टेटस/प्रगति रिपोर्ट सौंपें।

कोर्ट ज़िला बार एसोसिएशन के कामकाज को संभालने के लिए बनाई गई एल्डर्स कमेटी द्वारा दायर एक अर्जी पर सुनवाई कर रहा है।

बेंच ने गौर किया कि पिछले महीने दिए गए अपने पहले के आदेशों के अनुसार, चुनाव 9 सितंबर, 2026 को होने थे।

कोर्ट के सामने दी गई जानकारी के अनुसार, 9 सितंबर को मतदान शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। अगले दिन गिनती शुरू हुई और दोपहर करीब 3:30 बजे तक शांति से चलती रही, तभी गिनती के दौरान मौजूद वकीलों की भीड़ ने कथित तौर पर बैलेट बॉक्स लूट लिए।

कोर्ट ने कहा कि इस घटना ने मतदान और चुनाव कराने की पूरी प्रक्रिया को "बेकार" कर दिया।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि एल्डर्स कमेटी के माध्यम से चुनाव कराने के अपने पहले के आदेशों के बावजूद यह घटना हुई।

कोर्ट को बताया गया कि अगली सुबह, उस कमरे का ताला तोड़ दिया गया जहां बैलेट बॉक्स और चुनाव का अन्य सामान रखा गया।

कथित तौर पर DVR/CCTV फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई और उसे ले जाया गया। इसके बाद एल्डर्स कमेटी ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर 14 सितंबर, 2026 को कोतवाली सुल्तानपुर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई।

घटना का वीडियो फुटेज वाली एक पेन ड्राइव भी कोर्ट के सामने पेश की गई। बेंच के सामने दी गई जानकारी के अनुसार, फुटेज में वे लोग दिखाई दे रहे थे, जो कथित तौर पर इस घटना में शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि यह घटना सुल्तानपुर में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट परिसर के अंदर हुई और यह घटना तब हुई जब हाई कोर्ट ने चुनाव कराने का आदेश दिया।

बेंच ने कहा कि सबसे पहले उन लोगों की पहचान करना ज़रूरी है, जो इस घटना में शामिल हैं।

कोर्ट ने कहा कि पहली नज़र में यह घटना न सिर्फ़ एक अपराध हो सकती है, बल्कि कोर्ट के आदेशों की अवमानना ​​भी हो सकती है, क्योंकि यह उन निर्देशों को लागू करने में रुकावट डालने जैसा था जिनके तहत एल्डर्स कमेटी को चुनाव कराने थे।

कोर्ट ने आदेश दिया कि एल्डर्स कमेटी या बार के सदस्यों के पास मौजूद सभी सबूत FIR/केस क्राइम नंबर 487/2026 के जांच अधिकारी को सौंपे जाएं।

कोर्ट ने सुल्तानपुर के डिस्ट्रिक्ट जज को एल्डर्स कमेटी और बार के सदस्यों की मदद से जांच करने का भी निर्देश दिया।

इस जांच में उन लोगों या वकीलों की पहचान की जाएगी, जो कथित तौर पर उस घटना में शामिल थे, जिसके कारण चुनाव में रुकावट आई और "बैलेट बॉक्स की लूटपाट आदि" हुई।

डिस्ट्रिक्ट जज को निर्देश दिया गया कि वह अगली तारीख तक हाई कोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपें जिसमें कथित दोषियों के नाम हों।

हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि FIR की जांच और उसके द्वारा आदेशित जांच के मकसद अलग-अलग होंगे।

जहां FIR और जांच आपराधिक कानून के तहत आगे बढ़ेगी, वहीं कोर्ट के आदेश से होने वाली जांच वकीलों के व्यवहार से जुड़ी होगी। यह जांच 'एडवोकेट्स एक्ट, 1961' और उसके तहत बने नियमों के आधार पर होगी। साथ ही, मामले के हिसाब से 'कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट्स एक्ट, 1971' या संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा।

एक अहम बात कहते हुए कोर्ट ने आगे कहा:

"हम हुई घटना से आंखें नहीं मूंद सकते और न ही इसे नज़रअंदाज़ कर सकते हैं। यह न्याय व्यवस्था, बार के सदस्यों और ज़िला बार एसोसिएशन के लिए कुछ वकीलों की ओर से एक चुनौती है। अगर वे ऐसी घटना में शामिल पाए जाते हैं तो वे बार के सदस्य बने रहने के लायक नहीं होंगे।"

बेंच ने कहा कि अगर कुछ वकील इस घटना में शामिल पाए जाते हैं तो बार के सदस्य के तौर पर उनके बने रहने और प्रैक्टिस जारी रखने के उनके अधिकार पर अलग से विचार किया जाएगा।

कोर्ट ने ज़िला बार एसोसिएशन के सभी सदस्यों से यह उम्मीद भी जताई कि वह घटना में शामिल "बिरादरी के गलत लोगों" (Blacksheep) की पहचान करने में सहयोग करेंगे।

उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को निर्देश दिया गया कि वह घटना पर अपना रुख स्पष्ट करे और बताए कि वह क्या कार्रवाई करने का इरादा रखती है।

चूंकि चुनाव में बाधा आई, इसलिए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि गवर्निंग काउंसिल के चुनाव "हर हाल में" कराए जाएं।

सुल्तानपुर के ज़िला जज को 'एल्डर्स कमेटी' की मदद से चुनाव कराने के लिए एक तरीका और शेड्यूल बनाने का निर्देश दिया गया। ज़िला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया गया कि वह अपनी देखरेख में चुनाव कराने के लिए हर ज़रूरी मदद दें।

ज़िला जज और एल्डर्स कमेटी को यह भी निर्देश दिया गया कि वह एक हफ़्ते के भीतर वोटिंग और वोटों की गिनती का तरीका और तारीख तय करें और बार के सदस्यों को इसकी जानकारी दें।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि नई वोटिंग निष्पक्ष रूप से कराई जाए और ज़िला प्रशासन, ज़िला जज और एल्डर्स कमेटी के साथ मिलकर सुरक्षा के सभी ज़रूरी इंतज़ाम करे।

मामले को 22 अक्टूबर को सुनवाई के लिए लिस्ट करने का निर्देश दिया गया।

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