दादा-दादी/नाना-नानी से अचानक अलग होने पर बच्चा परेशान हो सकता है: राजस्थान हाईकोर्ट ने पिता के लिए चरणबद्ध कस्टडी की व्यवस्था तय की
राजस्थान हाईकोर्ट ने 7 साल के बच्चे की कस्टडी उसके पिता को देने से इनकार किया। कोर्ट ने पाया कि बच्चा जन्म से ही अपने नाना-नानी के साथ रह रहा है, इसलिए अचानक उसे कहीं और भेजने से उसे मानसिक परेशानी हो सकती है, जो बच्चे के हित में नहीं होगा।
जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस संगीता शर्मा की बेंच ने पिता को चरणबद्ध तरीके से मुलाक़ात और कुछ समय के लिए कस्टडी के अधिकार दिए। कोर्ट ने माना कि पिता को ऐसा माहौल बनाने का पूरा अधिकार है जिससे बाद में बच्चा उनके साथ रहने के लिए तैयार हो सके।
बेंच ने कहा,
"अपीलकर्ताओं के वकील का कहना है कि बच्चा कुछ समय के लिए भी पिता के साथ जाने को तैयार नहीं है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। शुरुआत में बच्चा शायद अचानक न जाए, लेकिन परिवार के साथ जुड़ाव बढ़ने पर वह पिता के साथ रहने की इच्छा दिखा सकता है। ऐसा तभी हो सकता है जब पिता और बेटे के बीच जुड़ाव बढ़ाने वाला माहौल बनाया जाए।"
बता दें, बच्चे के नाना-नानी (याचिकाकर्ता) ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी जिसमें पिता की कस्टडी की अर्ज़ी मंज़ूर कर ली गई।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बच्चा जन्म से ही उनके साथ रह रहा है और पिता के पास जाने को तैयार नहीं है। अगर कस्टडी पिता को सौंप दी गई तो बच्चे को बहुत परेशानी होगी। यह भी कहा गया कि पिता शराब के आदी हैं।
दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि अभिभावक का कस्टडी का अधिकार बच्चे के कल्याण से कम महत्वपूर्ण है। साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि पिता 7 साल से ज़्यादा समय तक बच्चे से नहीं मिले, इसलिए बच्चा पिता के साथ रहने को तैयार नहीं था।
इसे देखते हुए कोर्ट ने कहा कि नाबालिग की कस्टडी पिता को सौंपना उसके हित में नहीं है, क्योंकि इससे अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं और बच्चे की मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।
आगे कहा गया,
“इसमें कोई शक नहीं कि पिता आर्थिक रूप से मज़बूत हो सकते हैं, लेकिन बच्चे के भले का फ़ैसला करने के लिए पिता का कानूनी अधिकार और उनकी आर्थिक क्षमता ही एकमात्र आधार नहीं हैं। जिस पारिवारिक माहौल में बच्चा बड़ा हुआ है, वह भी एक अहम बात है और बच्चे ने दादा-दादी/नाना-नानी के साथ जो समय बिताया है, वह भी मायने रखता है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”
साथ ही कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता बच्चे से मिलने के पिता के अधिकार से इनकार नहीं कर सकते। परिवार के बीच जुड़ाव तभी बन सकता है जब मिलने-जुलने (विज़िटेशन) और कुछ समय के लिए कस्टडी (अस्थायी कस्टडी) जैसे अधिकार देकर अनुकूल माहौल बनाया जाए।
इस पृष्ठभूमि में कोर्ट ने पिता को तुरंत कस्टडी देने से इनकार करते हुए अपील आंशिक रूप से मंज़ूरी की। साथ ही मिलने-जुलने तथा अस्थायी कस्टडी के कुछ अधिकार दिए, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना है।
Case Title : R v S