पहली मैटरनिटी लीव के 2 साल के अंदर दूसरी मैटरनिटी लीव पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Update: 2026-04-23 04:19 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि पहली मैटरनिटी लीव के 2 साल के अंदर किसी महिला द्वारा दूसरी मैटरनिटी लीव मांगने पर कोई रोक नहीं है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के पिछले फैसले, 'अनुपम यादव और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य' पर भरोसा करते हुए जस्टिस करुणेश सिंह पवार ने कहा,

"अनुपम यादव (उपर्युक्त) मामले में जैसा कि फैसले को पढ़ने से साफ पता चलता है, किसी कर्मचारी के लिए पहली मैटरनिटी लीव मिलने के दो साल के अंदर दूसरी मैटरनिटी लीव का लाभ मांगने पर कोई रोक नहीं है।"

याचिकाकर्ता ने अपनी दूसरी मैटरनिटी लीव रद्द किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

'अनुपम यादव और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य' मामले में यह फैसला दिया गया था कि एक बार जब उत्तर प्रदेश राज्य में 'मैटरनिटी बेनिफिट्स एक्ट, 1961' के प्रावधानों को अपना लिया गया तो 'फाइनेंशियल हैंडबुक' के प्रावधान इस एक्ट के प्रावधानों पर भारी नहीं पड़ सकते। यह माना गया कि 'फाइनेंशियल हैंडबुक' कार्यकारी निर्देशों का एक समूह है, जिसे किसी विधायी कानून के प्रावधानों के सामने झुकना चाहिए।

इसी तरह के हालात में उस मामले की याचिकाकर्ता को 'फाइनेंशियल हैंडबुक' के आधार पर दूसरी मैटरनिटी लीव देने से मना किया गया, जिसे कोर्ट ने पलट दिया था।

तदनुसार, कोर्ट ने फैसला दिया कि पहली मैटरनिटी लीव के 2 साल के अंदर दूसरी मैटरनिटी लीव मांगी जा सकती है और इस एक्ट के तहत इस पर कोई रोक नहीं है। रिट याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने प्रतिवादी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता की दूसरी मैटरनिटी लीव मंजूर करे।

Case Title: Manisha Yadav v. State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy./ Prin. Secy., Deptt. Of Technical Edu. Lko. And Another

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