सिखों पर टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने से वाराणसी कोर्ट के इनकार को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, जिसमें वाराणसी कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसने सिख समुदाय के बारे में सितंबर 2024 की अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान की गई टिप्पणियों को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली अर्जी को ठुकरा दिया।
जस्टिस विक्रम डी. चौहान की बेंच ने नागेश्वर मिश्रा और एक अन्य व्यक्ति द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दायर याचिका खारिज की। विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है।
बता दें, अक्टूबर 2025 में वाराणसी की MP/MLA कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने BNSS की धारा 173(4) के तहत दायर उस अर्जी को खारिज किया था, जिसमें सिख समुदाय के बारे में राहुल गांधी की कथित 'उकसावे वाली' टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई।
मजिस्ट्रेट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने केवल यह 'आशंका' जताई कि खालिस्तानी आतंकवादी गांधी के भाषण का इस्तेमाल हिंसा और प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसी आशंका को साबित करने के लिए किसी घटना या वाकये का कोई ठोस सबूत नहीं दिया।
नागेश्वर मिश्रा और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर अर्जी में आरोप लगाया गया कि गांधी के बयानों का मकसद लोगों को उनके राजनीतिक हितों के लिए लड़ने के लिए उकसाना था।
वाराणसी कोर्ट में पहले की कार्यवाही
शुरुआत में, ट्रायल कोर्ट ने 28 नवंबर 2024 को इस शिकायत को खारिज किया।
इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने क्रिमिनल रिवीजन (आपराधिक पुनरीक्षण) याचिका दायर की। रिवीजन कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका में राहुल गांधी द्वारा दिए गए भाषण के मामले पर फिर से विचार करें और एक नया आदेश जारी करें।
रिवीजन कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के बाहर दिए गए भाषणों की जांच के लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
रिवीजन कोर्ट के आदेश से जुड़ी एक अलग कार्यवाही में सितंबर 2025 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गांधी की उस याचिका को खारिज किया था, जिसमें उन्होंने मामले पर फिर से विचार करने के निर्देश को चुनौती दी थी।
पुनर्विचार के बाद वाराणसी के मजिस्ट्रेट ने अक्टूबर 2025 में एक नया आदेश पारित किया, जिसमें FIR दर्ज करने की मांग वाली अर्जी को फिर से खारिज कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने उस आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।
गांधी के खिलाफ आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सितंबर 2024 में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान, गांधी ने सवाल उठाया कि क्या भारत में सिख पगड़ी पहनने या गुरुद्वारों में जाने पर खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।
उन्होंने बताया कि खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने गांधी के बयान को सही ठहराया, जिससे उनके अनुसार "खालिस्तानी आतंकवादियों का काम आसान हो गया"।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि गांधी की टिप्पणियों से भारत में हिंसा भड़क सकती है और दुनिया भर में भारत-विरोधी प्रचार को बढ़ावा मिल सकता है।
याचिका में गांधी की इन टिप्पणियों के संभावित असर की तुलना दिसंबर 2019 में दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित 'भारत बचाओ रैली' के दौरान दिए गए उनके भाषणों से की गई। इसमें दावा किया गया कि उन भाषणों के कारण शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन हुए और बाद में दंगे भड़के, जिनमें 100 से अधिक लोगों की जान चली गई।
याचिकाकर्ताओं ने कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के कथित बयान का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि यह बयान देश में गृहयुद्ध भड़काने की साजिश का सबूत है।