DNA जांच में खामियों पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- वैज्ञानिक साक्ष्य के अभाव में भारी मन से देनी पड़ी जमानत

Update: 2026-06-05 09:30 GMT

बलात्कार और हत्या के एक गंभीर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए उत्तर प्रदेश की फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई।

हाईकोर्ट ने कहा कि पर्याप्त वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध न होने के कारण उसे भारी मन और गहरे दर्द के साथ आरोपी को जमानत देनी पड़ रही है।

जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने कहा कि DNA प्रोफाइल तैयार न हो पाने के पीछे पुरानी मशीनें और FSL की अधूरी आधारभूत सुविधाएं प्रमुख कारण हैं।

अदालत ने टिप्पणी की कि इसके लिए किसी और को नहीं, बल्कि राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

मामले के अनुसार एक महिला के साथ कथित तौर पर बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। प्रारंभिक FIR अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज हुई थी लेकिन बाद में एक कथित प्रत्यक्षदर्शी के विलंब से दर्ज बयान के आधार पर मनोज को आरोपी बनाया गया।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के कथित निशानदेही पर खुले खेत से मृतका की घड़ी बरामद होना उसके खिलाफ निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जा सकता। साथ ही प्रत्यक्षदर्शी का बयान देर से दर्ज होने से अभियोजन की कहानी पर भी संदेह पैदा होता है।

बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि FSL रिपोर्ट के अनुसार मृतका के योनि नमूने में मिले DNA का मिलान आरोपी के DNA से नहीं हुआ। इस आधार पर आरोपी को झूठा फंसाए जाने का दावा करते हुए जमानत की मांग की गई।

राज्य सरकार और वादी पक्ष की ओर से जमानत का विरोध किया गया लेकिन वे इन तथ्यों का प्रभावी खंडन नहीं कर सके।

जमानत मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में सबसे बड़ी विसंगति यह है कि DNA प्रोफाइल पूरी तरह तैयार न होने के कारण योनि नमूने में मिले DNA के स्रोत का निर्धारण नहीं हो सका।

अदालत ने इसे जांच प्रक्रिया और FSL की अधूरी सुविधाओं से जुड़ी गंभीर समस्या बताया।

पीठ ने कहा कि उसके समक्ष ऐसे अनेक मामले आ रहे हैं, जिनमें बलात्कार के बाद महिलाओं की हत्या हुई लेकिन DNA सैंपल भेजे जाने के बावजूद FSL रिपोर्ट में अधूरी DNA प्रोफाइल के कारण अपराधी की पहचान सुनिश्चित नहीं हो पाती।

अदालत ने अपने एक हालिया आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें उत्तर प्रदेश FSL के निदेशक ने बताया था कि राज्य की अधिकांश लैब कर्मचारियों की भारी कमी और आधुनिक मशीनों के अभाव से जूझ रही हैं।

हाईकोर्ट ने कहा,

"यह अत्यंत जघन्य अपराध का मामला है, जिसमें एक महिला के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या की गई। लेकिन उचित वैज्ञानिक साक्ष्य के अभाव में अदालत आरोपी को जमानत देने के लिए विवश है।"

मामले का निस्तारण करते हुए अदालत ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार फोरेंसिक लैब को आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराएगी और पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति करेगी। साथ ही आदेश की प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया।

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