शादी और धार्मिक आयोजनों में हर्ष फायरिंग के लिए नहीं है लाइसेंसी हथियार, कारतूसों का पूरा हिसाब रखना होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Update: 2026-08-01 07:03 GMT

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल शादी, धार्मिक आयोजनों या किसी भी प्रकार की हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक शस्त्र लाइसेंसधारी का दायित्व है कि वह खरीदे गए कारतूसों और उनके उपयोग का पूरा रिकॉर्ड रखे। ऐसा नहीं करने पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।

जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की सिंगल बेंच ने अखिलेश कुमार की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने लाइसेंसिंग प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी के उस आदेश को चुनौती दी, जिसके तहत उसका शस्त्र लाइसेंस रद्द कर दिया गया।

मामले के अनुसार याचिकाकर्ता को वर्ष 2000 में शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया।

वर्ष 2019 में निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने खरीदे गए और उपयोग किए गए कारतूसों का विवरण मांगा। जांच में पता चला कि उसने कुल 857 कारतूस खरीदे थे लेकिन वह केवल 57 जिंदा कारतूस और 33 खाली खोखे ही प्रस्तुत कर सका। शेष 757 कारतूसों के बारे में उसने बताया कि उनका इस्तेमाल प्रशिक्षण, शादी, छठ पूजा और दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों में किया गया।

लाइसेंसिंग प्राधिकारी ने इस स्पष्टीकरण को असंतोषजनक मानते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने कारतूसों के उपयोग का कोई रिकॉर्ड या ठोस विवरण नहीं दिया। इसके बाद शस्त्र अधिनियम की धारा 17 के तहत उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। अपीलीय प्राधिकारी ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद याचिकाकर्ता हाईकोर्ट पहुंचा।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पुराने नियमों के तहत इस्तेमाल किए गए कारतूसों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य नहीं था और वर्ष 2018 की अधिसूचना उसके मामले पर लागू नहीं होती। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने शस्त्र अधिनियम शस्त्र नियम, 2016 और लाइसेंस की शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि शस्त्र लाइसेंस कोई अधिकार नहीं बल्कि एक विशेष सुविधा है, जो निर्धारित शर्तों का कड़ाई से पालन करने पर ही दी जाती है। लाइसेंसिंग प्राधिकारी को यह जांचने का पूरा अधिकार है कि खरीदे गए कारतूस कहां और किस उद्देश्य से इस्तेमाल किए गए तथा लाइसेंसधारी सभी शर्तों का पालन कर रहा है या नहीं।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता न तो 757 कारतूसों का कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत कर सका और न ही उनके उपयोग का संतोषजनक विवरण दे पाया। यदि इतने बड़े पैमाने पर कारतूस शादी और धार्मिक आयोजनों में हर्ष फायरिंग के लिए इस्तेमाल किए गए, तो यह स्वयं लाइसेंसी हथियार के दुरुपयोग का प्रमाण है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

"लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता न केवल कारतूसों की खरीद और उपयोग का विवरण देने में विफल रहा, बल्कि उसने शादी और धार्मिक आयोजनों में हथियार का दुरुपयोग भी किया।"

हाईकोर्ट ने माना कि 757 कारतूसों का हिसाब नहीं दे पाना अपने आप में लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। इसलिए लाइसेंस निरस्त करने के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है और उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका खारिज की।

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