" देश विरोधी" बताने पर जी न्यूज को गौहर रजा को एक लाख रुपये और माफी मांगने के निर्देश
न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्डस अथॉरिटी ( NBSA) ने हिंदी चैनल जी न्यूज को कवि और वैज्ञानिक गौहर रजा को एक लाख रुपये देने से साथ-साथ माफी मांगने को कहा है। जी न्यूज ने रजा के शंकर-शाद मुशायरे में कविता गाने पर " अफजल प्रेमी गैंग " के तौर पर पेश किया था।
दरअसल जी न्यूज ने पिछले साल मार्च में इस मुशायरे पर " अफजल प्रेमी गैंग का मुशायरा " नाम का कार्यक्रम कई बार प्रसारित किया और मुशायरे में हिस्सा लेने वालों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। ये मुशायरा 1954 से आयोजित किया जा रहा है और इसका मकसद उर्दू कविता के जरिए भारत पाकिस्तान के सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करना है।
रजा ने दलील दी थी कि प्रसारित कार्यक्रम न्यूज ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशन के कोड ऑफ एथिक्स एंड ब्रॉडकास्टिंग के तहत निष्पक्षता और तटस्थता के सिद्धांत के खिलाफ है। रजा ने ये भी आरोप लगाया था कि चैनल में जानूझकर कार्यक्रम का कुछ-कुछ हिस्सा काट-छांटकर दिखाया और उन्हें आधारहीन तथ्यों के जरिए देश विरोधी बताने की कोशिश की।
NBSA ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि ब्रॉडकास्टर ने इस मामले में प्रोफेसर गुलजार रजा को इस मामले में अपने विचार या पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। प्रसारण में मुशायरे को जेएनयू घटना को से जोडकर दिखाना और इसका नाम " अफजल प्रेमी गैंग का मुशायरा " रखना पूरी तरह अनुचित और अपमानजनक हैं क्योंकि कविता में कन्हैया, जेएनयू विश्वविद्यालय और रोहित वैमूला को जिक्र करना इस तरह ब्रांड करने से कवि, मुशायरा आयोजक और श्रोताओं को अफजल प्रेमी गैंग के तौर पर पेश करने का कोई आधार नहीं बनता।
NBSA ने कहा कि सब सदस्य एकमत से मानते हैं कि पूरा कार्यक्रम एकतरफा तरीके से मुद्दे को सनसनीखेज बनाने और तथ्यों को तरोडमरोड कर खबर के तौर पर पेश किया गया।
चैनल को 8 सितंबर तो माफीनामा प्रकाशित करने को कहा गया है और जी न्यूज की वेबसाइट या अन्य लिंक से इस कार्यक्रम को हटाने को कहा गया है। हालांकि प्रोफेसर रजा के एक करोड रुपये के मुआवजे को नहीं माना गया क्योंकि ये अथॉरिटी के अधिकारक्षेत्र से बाहर है।