पुस्तक समीक्षाःभारतीय पर्यावरण कानून पर पी.बी. सहसरानमन की ग्रीन बुक

Update: 2017-06-17 09:52 GMT

इस साल विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पांच जून को विश्व जानना चाहता था कि 105 देशों द्वारा हस्ताक्षरित पेरिस क्लाइमेट चेंज एग्रीमेंट से यूएस के पीछे हटने के क्या परिणाम होंगे। वहीं पूरा देश जानना चाहता है कि क्या राष्ट्रपति ट्रम्प का यह दावा सही है कि भारत पूरे विश्व में सबसे ज्यादा प्रदूषक देश है। जब सबकी नजर भारत और उसके पर्यावरण संरक्षण पर है,उसी समय भारतीय पर्यावरण कानून पर पी.बी. सहसरानमन की ग्रीन बुक का पहला संस्करण रिलीज किया गया है।

यह किताब तीन हिस्सों में है। पहले हिस्से में भारत में पर्यावरण के संबंध लागू एक्ट,रूल व नोटिफिकेशन का जिक्र किया गया है। इस किताब में प्रत्येक कानून या अध्यादेश से पहले इस संबंध में शब्दावली को परिभाषित करने का प्रयास किया गया है।

किताब के दूसरे हिस्से में पर्यावरण से संबंधित विभिन्न केसों में सुप्रीम कोर्ट,हाईकोर्ट व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए मुख्य फैसलों का जिक्र किया गया है।

किताब के तीसरे हिस्से की अनूठी विशेषता है। जो पर्यावरण कानून का शब्दकोष है,जिसमें कई तकनकी शब्दों को परिभाषित किया गया है ताकि पर्यावरण पर बने कानून को समझने में मदद मिल सके। अगरे पूरी किताब की छाप की बात करे तो ऐसा लगता है कि भारत में मजबूत पर्यावरण के दौर में भी बिजनेस के लिए कई मौका परस्त बचाव के रास्ते बनाए गए है। यह समस्या कानून से संबंधित नहीं है बल्कि उसको लागू करने के कारण है।
यह किताब लाॅ प्रैक्टिशनर,शिक्षक,कानून की पढ़ाई करने वाले छात्र व सरकारी एजेंसियों के लिए लाभदायक साबित होगी।

किताब के लेखक एक जाने-माने एंवायरमेंटल लाॅ प्रैक्टिशनर है,जिन्होंने इस किताब को लिखने में काफी मेहनत की है,जो समय की जरूरत है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने किताब की भूमिका में इसकी प्रशंसा की है। किताब के प्रकाशक ने इस किताब की प्रिंटिग में इसे इंटरनेशनल टच दिया है और इसका ग्रीन कवर बनाया है। अंत में यही कहा जा सकता है कि यह किताब पर्यावरण कानून के मामले में प्रतिष्ठा का विषय है। इस किताब को विमोचन चार जून को केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने किया था।