पुस्तक समीक्षाः रत्नलाल एंड धीरजलाल सीआरपीसी 22वां संस्करणः जस्टिस सीके प्रसाद व नमिता सक्सेना द्वारा संशोधित
अपराध प्रक्रिया संहिता 1973(दाॅ कोड आॅफ क्रिमनल प्रोसिजर) न्याय वितरण का एक वाहन व साधन है,जिसकी निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक प्रासंगिकता है।
इसको सालों तक लगातार वैधानिक संशोधनों व न्यायिक व्याख्या के जरिए विकसित किया गया है ताकि इसकी वर्तमान आकृति को स्वीकार किया जा सके।
रत्नलाल व धीरजलाल की अपराध प्रक्रिया संहिता पर दी गई व्याख्या एक लीगल क्लासिक है,जिसने लगभग पूरी शताब्दी तक कानूनी बिरादरी की सेवा की है। इसके तहत प्रोसिजर के तकनीकी रूल व कठिन कानूनी मुद्दों का सरलीकरण कर दिया गया है।
इस पूरी व्याख्या को अच्छे से लिखा गया है और सेक्शन वाइज विचार-विमर्श किया गया है। जिस कारण इस व्याख्या को भारत में अपराध प्रकिया संहिता पर की गई सबसे प्रामाणिक व प्रमुख व्याख्या माना गया है।
वर्तमान के संस्करण को संशोधित करने व उसमें सुधार करने का काम सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस सीके प्रसाद (जो इस समय प्रेस कांउसिल आॅफ इंडिया के चेयरपर्सन भी है) व क्रिमनल लाॅ में सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली वकील नमिता सक्सेना ने किया है।
इस प्रमुख बुक के आने वाले नए संस्करण को पूरी मेहनत से तैयार किया गया है,जिसमें तत्कालीन केस,वैधानिक संशोधन,वर्तमान में हुई प्रगति व आपराधिक प्रक्रिया से संबंधित विकसित हुई न्यायिक प्रवृति या विचारधारा को शामिल किया गया है।
पिछले कई सालों से हुए वैधानिक बदलावों व ऊपरी अदालतों के वर्तमान में दिए गए फैसलों को भी शामिल किया गया है।
भारत के लाॅ कमीशन के चेयरपर्सन व सुप्रीम कोर्ट से रिटायर्ड जज जस्टिस बीएस चैहान ने खुशी से इस संस्करण की बहुत की सुंदर शब्दों में प्रस्तावना या भूमिका लिखी है,जिसमें इस संस्करण के महत्व के बारे में बताया गया है। वास्तविकता,मौलिकता व विश्वसनीयता हमेशा से इस पब्लिकेशन का हाॅलमार्क रहा है। इस संस्करण में भी मौलिकता या नवीनता को बनाए रखने के लिए हर संभव सावधानी बरती गई है ताकि इस काम की मूल प्रतिष्ठा,रूप व गुणवत्ता बनी रहे।
लेखकों व प्रकाशक का प्रयास यह रहा है कि यह संस्करण अपने रीडर (छात्र व प्रोफेशनल) के लिए लाभकारी साबित हो और उनको सीखने व भारत में आपराधिक कानून के प्रकियात्मक पहलू को अपडेट करने में अच्छी सहायता दे।
इस संस्करण में अध्ययन के अंत में एक तीव्र संक्षिप्त विवरण को भी जोड़ा गया है ताकि इस विषय को तेजी व शीघ्रता से समझा जा सके।
इस संस्करण में कुल 1350 पेज है,जिनको चैप्टर वाइज व सेक्शन वाइज बांटा गया है। जिनमें सभी अनुच्छेद व नामावली को कवर किया गया है। यह किताब अच्छे व वहन करने योग्य मूल्य पर उपलब्ध है। इसका मूल्य 845 रूपए है। इस किताब का प्रकाशन लेक्सिस नेक्सिस इंडिया ने किया है,जो लाॅ की किताबों को प्रकाशित करने में काफी बड़ा प्रकाशक है।
यह किताब दोषरहित व शुद्ध है। गुणवत्ता व परिणाम के मामले में यह काफी उपयोगी है। प्रोसिजरल क्रिमनल लाॅ को समझने के इच्छुक छात्रों,प्रोफेशनल व शिक्षकों को इस किताब को अपनी दराज में जरूर रखना चाहिए व पढ़ना चाहिए।