UP Gangsters Act | 'कानून को छोटा समझते हैं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनिवार्य संयुक्त बैठक में शामिल न होने पर DM से स्पष्टीकरण मांगा

Shahadat

17 April 2026 4:01 PM IST

  • UP Gangsters Act | कानून को छोटा समझते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनिवार्य संयुक्त बैठक में शामिल न होने पर DM से स्पष्टीकरण मांगा

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में मिर्ज़ापुर के ज़िलाधिकारी (DM) पवन कुमार गंगवार को यूपी गैंगस्टर नियम, 2021 के तहत 'गैंग चार्ट' को मंज़ूरी देने के लिए ज़रूरी अनिवार्य संयुक्त बैठक में शामिल न होने पर कड़ी फटकार लगाई।

    उनकी अनुपस्थिति का गंभीर संज्ञान लेते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की पीठ ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया, अधिकारी "कानून को छोटा समझते हैं। इसकी बिल्कुल भी परवाह नहीं करते, जैसा कि अक्सर पढ़े-लिखे आम लोगों के साथ होता है।"

    कोर्ट ने अब इस मामले पर उनसे व्यक्तिगत स्पष्टीकरण मांगा।

    खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा,

    "ऐसा लगता है कि वह कानून को एक अनावश्यक और परेशान करने वाला बोझ मानते हैं। उन्हें संयुक्त बैठक से अपनी अनुपस्थिति का स्पष्टीकरण देना चाहिए, जहां इस मामले में गैंग चार्ट को मंज़ूरी दी गई, जिसके कारण जनता का समय और पैसा बर्बाद हुआ और एक अभियोजन शुरू किया गया, जिसका परिणाम लगभग तय है।"

    बता दें, 2021 के नियमों के नियम 5(3)(a) के तहत गैंग चार्ट को मंज़ूरी देने के लिए ज़िलाधिकारी और ज़िला पुलिस अधीक्षक के बीच एक संयुक्त बैठक अनिवार्य है। यह संयुक्त बैठक उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 3(1) के तहत FIR दर्ज करने से पहले एक सख्त शर्त है।

    हालांकि, वर्तमान मामले में DM ने 16 सितंबर, 2025 को आरोपी/याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रस्तावित गैंग चार्ट को अलग से मंज़ूरी दी। उनके साथ केवल स्थानीय इंस्पेक्टर ही मौजूद थे।

    अपने आदेश में खंडपीठ ने पाया कि मामले के रिकॉर्ड से पता चला कि गैंग चार्ट का प्रस्ताव शुरू में 8 अगस्त को रखा गया, जहां केवल निम्नलिखित तीन अधिकारी मौजूद थे:

    1. मिर्ज़ापुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोमेन वर्मा,

    2. नोडल अधिकारी (गैंग चार्ट) ओम प्रकाश सिंह, और

    3. अभियोजन के संयुक्त निदेशक गजराज मिश्रा।

    DM इस बैठक से स्पष्ट रूप से अनुपस्थित थे।

    इसका गंभीर संज्ञान लेते हुए खंडपीठ ने कहा कि DM को कोर्ट को यह स्पष्टीकरण देना होगा कि उन्हें ऐसा क्यों लगा कि "नियम 5(3)(a) के तहत एक संयुक्त बैठक उनकी अनुपस्थिति में आयोजित की जा सकती है"।

    अदालत ने आगे कहा कि उनके कार्य हाईकोर्ट की एक डिवीज़न बेंच द्वारा 'सन्नी मिश्रा @ संजयन कुमार मिश्रा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 2 अन्य' मामले में तय किए गए कानून के विपरीत थे; जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के 'राजेंद्र बिहारी लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य' [2025 LiveLaw (SC) 1021] मामले में भी सही ठहराया था।

    इसलिए इस मामले को 30 अप्रैल, 2026 के लिए सूचीबद्ध करते हुए अदालत ने गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता (भगमनी देवी) की गिरफ्तारी पर रोक लगाकर उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की।

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