तेलंगाना गवर्नर और इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस HCBA शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए; चुनाव समिति ने भी कार्यक्रम का बहिष्कार किया
Shahadat
3 Nov 2026 7:26 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA) के 2026-27 के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण भंसाली अनुपस्थित रहे।
इन दोनों को क्रमशः मुख्य अतिथि और विशेष अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में शामिल होना था। हालांकि, समारोह में उनकी अनुपस्थिति का कारण अभी तक पता नहीं चल सका है।
इस बीच, मुख्य रिटर्निंग ऑफिसर और चुनाव समिति के सदस्यों ने भी समारोह का बहिष्कार किया।
आज इससे पहले, मुख्य रिटर्निंग ऑफिसर और सीनियर एडवोकेट एसएफए नकवी तथा HCBA चुनावों की देखरेख करने वाले रिटर्निंग ऑफिसर्स ने औपचारिक रूप से सूचित किया कि वे समारोह में शामिल नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में उनकी उपस्थिति न तो 'उचित' होगी और न ही 'वांछनीय'।
यह निर्णय एक पत्र के माध्यम से नवनिर्वाचित HCBA अध्यक्ष डॉ. सी.पी. उपाध्याय, महासचिव संतोष कुमार मिश्रा और एल्डर्स कमेटी के अध्यक्ष वी.के. सिंह को सूचित किया गया।
इस पत्र पर नकवी और चुनाव समिति के अन्य सदस्यों—जिनमें सीनियर एडवोकेट तिवारी, जे.बी. सिंह, लक्ष्मी कांत मिश्रा, राज कुमार शुक्ला और अनुभव शुक्ला शामिल हैं—के हस्ताक्षर हैं।
चुनाव समिति का यह बहिष्कार ऐसे समय में हुआ है, जब बार (वकीलों) और बेंच (जजों) के कुछ वर्गों के बीच तनाव चल रहा है। इसके अलावा, एसोसिएशन की चुनाव से जुड़ी इकाइयों के कामकाज और अधिकारों को लेकर भी मतभेद हैं।
हालांकि, चुनाव समिति ने समारोह से दूर रहने के अपने फैसले के पीछे एक विशेष प्रशासनिक और वित्तीय विवाद का हवाला दिया।
3 नवंबर को भेजे गए एक अलग संदेश में मुख्य रिटर्निंग ऑफिसर और रिटर्निंग ऑफिसर्स ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों द्वारा (2 नवंबर को) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद हाईकोर्ट शाखा के शाखा प्रबंधक को लिखे गए एक पत्र पर कड़ी आपत्ति जताई। इस पत्र में 'डेडिकेटेड इलेक्शन फंड अकाउंट' (निर्वाचन निधि खाते) के संचालन को रोकने की मांग की गई। चुनाव समिति के अनुसार, यह खाता मुख्य चुनाव अधिकारी और अन्य चुनाव अधिकारियों के संयुक्त हस्ताक्षरों से कानूनी रूप से संचालित किया जा रहा था।
चुनाव समिति ने इस पत्र को "अनधिकृत, समय से पहले और मानहानिकारक" करार देते हुए कहा कि नई घोषित/निर्वाचित इकाई ने अभी तक हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA) का कार्यभार आधिकारिक रूप से नहीं संभाला है।
पत्र में आगे कहा गया कि जब तक HCBA के नियमों के अनुसार औपचारिक रूप से कार्यभार का हस्तांतरण नहीं हो जाता, तब तक "कोई भी ऐसी मान्यता प्राप्त कार्यकारी इकाई नहीं है, जो एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व करने या उसकी ओर से कोई कार्रवाई करने की हकदार हो"।
चुनाव समिति ने एसोसिएशन के "आधिकारिक लेटरहेड पर औपचारिक निर्देश जारी करने" पर भी आपत्ति जताई है। समिति का दावा है कि नवनिर्वाचित अध्यक्ष और महासचिव के पास उस समय बैंक मैंडेट या संस्थागत खातों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं था।
पत्र में इस मामले में 'एल्डर्स कमिटी' (वरिष्ठ समिति) के हस्तक्षेप करने के अधिकार पर भी सवाल उठाया गया।
HCBA नियमों के नियम 8(g) का हवाला देते हुए चुनाव समिति ने बताया कि एल्डर्स कमिटी का कार्यकाल, जो 16 सितंबर 2026 को शुरू हुआ था और एक महीने के लिए तय था, 15 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो गया।
परिणामस्वरूप, समिति ने दावा किया कि एल्डर्स कमिटी का कार्यकाल खत्म हो चुका है और "कानून की नजर में अब इसका कोई अस्तित्व नहीं है"। समिति ने यह भी कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान भी एल्डर्स कमिटी के पास बैंकिंग कार्यों या नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार या क्षेत्राधिकार नहीं था।
चुनाव समिति ने अनुचित भुगतान के आरोपों को भी खारिज कर दिया और उन्हें "आधारहीन, बिना किसी सबूत के और गैर-जिम्मेदाराना" बताया। समिति ने जोर देकर कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से निर्धारित नियमों के अनुसार और वित्तीय सावधानी बरतते हुए संपन्न कराई गई थी।
बैंक को पत्र लिखने से पहले अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव समिति ने आरोप लगाया कि यह पत्र बैंक लेनदेन के संबंधित रिकॉर्ड और ठेकेदारों या आपूर्तिकर्ताओं को किए गए भुगतानों की जांच किए बिना ही जारी कर दिया गया।
चुनाव समिति ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से यह भी कहा है कि वे बैंक को भेजे गए 2 नवंबर के पत्र को तुरंत वापस लें और उसे रद्द करें। इसमें उनसे यह भी कहा गया कि जब तक वे कानून और HCBA नियमों के अनुसार औपचारिक रूप से अपना पदभार नहीं संभाल लेते, तब तक वे चुनाव समिति के प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में दखल न दें।
पत्र में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। इसमें कहा गया कि अगर आपत्तियों का समाधान नहीं किया गया, तो उचित दीवानी (सिविल) और आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाएगी, जिसमें मानहानि और आधिकारिक कार्यों में बाधा डालने से जुड़ी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
हालांकि, चुनाव समिति ने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों और कार्यकारी समिति के सदस्यों को "हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई" दीं।

