सुप्रीम कोर्ट ने 77 वर्षीय कैंसर पीड़ित की पेंशन याचिका पर शीघ्र सुनवाई के निर्देश दिए
Praveen Mishra
30 April 2026 6:02 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने आज इलाहाबाद हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि 77 वर्षीय कैंसर पीड़ित व्यक्ति की लंबित पेंशन याचिका पर आउट-ऑफ-टर्न सुनवाई की जाए। अदालत ने हाईकोर्ट से मामले को सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से देखने को कहा।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता ने 1 जून 1970 से 28 मई 1985 तक उत्तर प्रदेश राज्य सरकार में सेवा दी थी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देकर Gas Authority of India Limited (GAIL) जॉइन किया।
याचिकाकर्ता का दावा है कि राज्य सेवा छोड़ने के बाद वह यूपी सिविल सेवा विनियम, विशेष रूप से विनियम 418(b) के तहत पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों के हकदार थे। हालांकि, राज्य सरकार ने विनियम 418(a) का हवाला देते हुए उनके दावे को खारिज कर दिया।
इस मामले को लेकर याचिकाकर्ता ने 2017 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन पिछले 9 वर्षों से इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ। बताया गया कि मामला बार-बार स्थगित होता रहा, मुख्यतः जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगने के कारण।
याचिका में कहा गया कि “पेंशन कोई दया नहीं, बल्कि कर्मचारी का अधिकार है, जो Article 21 of the Constitution of India के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।” लंबे समय तक सुनवाई न होने से उनके मौलिक अधिकारों, खासकर अनुच्छेद 14 और 21, का उल्लंघन हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि मामले की जल्द सुनवाई कर उचित निर्णय लिया जाए।

