पहले की अपील वापस लेने के बाद उसी स्टाम्प ड्यूटी आदेश के खिलाफ दूसरी अपील स्वीकार्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

  • पहले की अपील वापस लेने के बाद उसी स्टाम्प ड्यूटी आदेश के खिलाफ दूसरी अपील स्वीकार्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 56(1-A) के तहत दायर कोई अपील इसलिए खारिज कर दी गई हो क्योंकि अपीलकर्ता ने उसे आगे न बढ़ाने का फैसला किया था, तो कलेक्टर के उसी आदेश के खिलाफ दोबारा अपील दायर नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसी अपील का कोई कानूनी अस्तित्व नहीं है, और इसके तहत राज्य की स्टाम्प निपटान योजना (स्टाम्प सेटलमेंट स्कीम) का लाभ भी नहीं लिया जा सकता।

    जस्टिस सैयद कमर हसन रिज़वी ने कहा,

    "यह स्पष्ट है कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 56(1-A) के तहत दायर बाद की अपील संख्या 1174/2021 कानूनी रूप से वैध अपील नहीं थी, बल्कि इसका कोई अस्तित्व ही नहीं था। विशेष रूप से तब, जब नई अपील दायर करने के लिए कोई अनुमति न तो दी गई और न ही ली गई।"

    याचिकाकर्ता ने 14.03.2019 को गोंडा में एक सेल डीड (बिक्री विलेख) के जरिए जमीन खरीदी, जिस पर 7,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से स्टाम्प ड्यूटी लगाई गई। जबकि उसी संपत्ति के बगल वाले हिस्से को, जिसे उनके पति ने खरीदा था, 28,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से स्टाम्प ड्यूटी लगाई गई। सब-रजिस्ट्रार की रिपोर्ट के आधार पर कि एक ही इकाई को दो अलग-अलग विलेखों (Conveyances) में बांट दिया गया, गोंडा के कलेक्टर ने अधिनियम की धारा 47A के तहत एकतरफा (Ex Parte) कार्रवाई की। 18.02.2020 को कलेक्टर ने आदेश दिया कि कम दी गई स्टाम्प ड्यूटी के रूप में 3,52,190 रुपये का भुगतान किया जाए, साथ ही इतनी ही राशि का जुर्माना और ब्याज भी देना होगा।

    धारा 56(1-A) के तहत अपनी अपील में याचिकाकर्ता ने 03.03.2021 को एक आवेदन दिया। इसमें उन्होंने कहा कि कानूनी सलाह के बाद वह अब इस अपील को आगे नहीं बढ़ाना चाहतीं। उन्होंने स्टाम्प ड्यूटी की कमी स्वीकार की, इसके लिए डीड राइटर (दस्तावेज लेखक) की गलत सलाह को जिम्मेदार ठहराया और जुर्माने को माफ करने का अनुरोध किया। इस आवेदन के आधार पर 25.03.2021 को अपील खारिज की गई, और उन्होंने 3,52,190 रुपये का भुगतान किया... 4,98,076/- की राशि पांच किश्तों में, जिसमें आखिरी किश्त 28.09.2021 को दी जानी थी।

    इसके बाद उन्होंने उसी आदेश के खिलाफ 18.11.2021 को दूसरी अपील दायर की। इसमें उन्होंने 24.12.2021 के सरकारी आदेश का लाभ मांगा। इस सरकारी आदेश के तहत, स्टाम्प से जुड़े लंबित मामलों, अपीलों और पुनरीक्षण (Revisions) में शामिल पक्षों को यह छूट दी गई कि वे कम जमा की गई राशि (Deficiency) को ब्याज और 100/- रुपये के मामूली जुर्माने के साथ जमा कर सकें। इस अपील को 17.02.2022 को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि यह सुनवाई योग्य (Maintainable) नहीं है।

    अदालत ने पाया कि धारा 56(1-A) की शुरुआत एक 'नॉन-ऑब्सटैंट क्लॉज़' (Non-Obstante Clause) से होती है, जो अपीलीय आदेश को अंतिम घोषित करती है। साथ ही, ऐसा कोई प्रावधान नहीं दिखाया जा सका जो उसी आदेश के खिलाफ कोई और अपील करने की अनुमति देता हो। 'दिल्ली सरकार (NCT) बनाम मूल चंद शर्मा' मामले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यदि पहली अपील को बिना दोबारा दायर करने की छूट (Liberty) के वापस ले लिया गया हो, तो दूसरी अपील नहीं की जा सकती।

    अदालत ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता ने कम जमा की गई राशि को स्वीकार कर लिया था और उसका भुगतान भी कर दिया था, इसलिए वह इस विवाद को फिर से नहीं खोल सकतीं। इसके अलावा, यह योजना केवल उन्हीं मामलों पर लागू होती थी जो इसके लागू होने से पहले शुरू किए गए।

    अदालत ने कहा,

    “24.12.2021 को केवल एक ही कार्यवाही लंबित बताई गई, जो कि बाद में दायर की गई एक अपील थी। ऊपर बताए गए कारणों के आधार पर कानून की नजर में यह कोई वैध कार्यवाही नहीं थी। इसलिए याचिकाकर्ता को 24.12.2021 के सरकारी आदेश के तहत मिलने वाली योजना का लाभ नहीं मिल सकता।”

    इस प्रकार, रिट याचिका खारिज की गई।

    Case Title : Smt. Manmeet Kaur v. State of U.P. through its Additional Chief Secretary Stamp and Registration, Lucknow and 2 others 2026 LiveLaw (AB) 845

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