ज़रूरी दस्तावेज़ होने के बावजूद बिड खारिज करना मनमाना और भेदभावपूर्ण: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया पर लगाई रोक

Shahadat

26 April 2026 4:21 PM IST

  • ज़रूरी दस्तावेज़ होने के बावजूद बिड खारिज करना मनमाना और भेदभावपूर्ण: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया पर लगाई रोक

    यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता की बिड ज़रूरी दस्तावेज़ देने के बावजूद खारिज कर दी गई, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि टेंडर देने वाले अधिकारी की फ़ैसला लेने की प्रक्रिया भेदभावपूर्ण है। इसलिए कोर्ट ने पूरी टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी और प्रतिवादियों को टेंडर के तहत कोई भी कॉन्ट्रैक्ट करने से मना किया।

    यह देखते हुए कि कोर्ट आम तौर पर टेंडर प्रक्रिया में दखल नहीं देता, जस्टिस शेखर बी. सर्राफ़ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा,

    “रिट याचिका के साथ लगाए गए दस्तावेज़ों से यह साफ़ है कि याचिकाकर्ताओं ने सभी ज़रूरी दस्तावेज़ दिए। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं को तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया। यह गैर-कानूनी फ़ैसला इस कोर्ट के सामने साफ़ तौर पर नज़र आता है, क्योंकि अधिकारी की फ़ैसला लेने की यह प्रक्रिया भेदभावपूर्ण लगती है और यह याचिकाकर्ताओं को हमारे संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(g) के तहत दिए गए समान अवसर प्रदान न करने जैसा है। इस कोर्ट का यह सुविचारित मत है कि किसी भी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट को देने में निष्पक्ष व्यवहार ही सबसे ज़रूरी आधार होता है।”

    उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम लिमिटेड ने अलग-अलग क्षमता वाले हाई डेंसिटी (एंटी-स्किड) पॉली एथिलीन (HDPE) बोरे (बिना लैमिनेशन वाले) और सर्कुलर लूम पर बुने हुए बैग की सप्लाई के लिए एक टेंडर का विज्ञापन निकाला था। याचिकाकर्ता ने ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ अपनी बिड जमा की। याचिकाकर्ता ने नेशनल सीड कॉर्पोरेशन लिमिटेड का एक पत्र भी दिया, जिसमें बताया गया कि उन्होंने उनके लिए इसी तरह का ऑर्डर सफलतापूर्वक पूरा किया।

    याचिकाकर्ता ने दलील दी कि हालांकि NSCL के परचेज़ ऑर्डर और सर्टिफ़िकेट से यह पता चलता था कि याचिकाकर्ता द्वारा NSCL को सप्लाई किए गए बैग उसी तरह के थे और याचिकाकर्ता के पास टेंडर को पूरा करने की तकनीकी विशेषज्ञता थी। फिर भी बिड को मनमाने और अतार्किक आधारों पर खारिज कर दिया गया। इसे इस आधार पर खारिज किया गया कि याचिकाकर्ता ने टेंडर की शर्तों के मुताबिक परचेज़ ऑर्डर और सफलतापूर्वक काम पूरा होने का सर्टिफ़िकेट अपलोड नहीं किया।

    यह तर्क दिया गया कि परचेज़ ऑर्डर की कॉपियों के साथ याचिकाकर्ता के आवेदन को भी खारिज कर दिया गया और ठीक अगले ही दिन, जो कि रविवार था, फ़ाइनेंशियल बिड खोली गई। यह तर्क दिया गया कि यह प्रक्रिया किसी एक पक्ष को फ़ायदा पहुंचाने के लिए चलाई जा रही थी। दस्तावेज़ों की जांच करते हुए कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने NSCL को HDPE बैग्स की सप्लाई सफलतापूर्वक पूरी की थी। इस आधार पर बोली को खारिज करना कि उसने परचेज़ ऑर्डर और कंप्लीशन सर्टिफिकेट अपलोड नहीं किया था, मनमाना था।

    “प्रथम दृष्टया, हमारा मानना ​​है कि याचिकाकर्ताओं को इस आधार पर अयोग्य ठहराना कि उन्होंने पिछले तीन वर्षों में HDPE बैग्स की सप्लाई को दर्शाने के लिए पर्याप्त दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं कराए, उचित नहीं है। यह मनमाना तथा दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होता है। जिस आधार पर याचिकाकर्ताओं को अयोग्य ठहराया गया और संक्षिप्त जवाबी हलफनामे में जो औचित्य दिया गया, वह भी देखने में ही गलत है।”

    कोर्ट ने माना कि निर्णय लेने की प्रक्रिया पक्षपात और मनमानी से दूषित थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसी अवैध निर्णय लेने की प्रक्रिया भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(g) का उल्लंघन है, क्योंकि यह प्रतिभागियों को समान अवसर (level playing field) प्रदान नहीं करती है।

    पूरी टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह उन दो प्रतिभागियों को पक्षकार बनाए जिन्हें अलग-अलग साइज़ के बैग्स के लिए L1 घोषित किया गया। कोर्ट ने प्रतिवादी के वकील को यह निर्देश भी दिया कि वह इस संबंध में निर्देश प्राप्त करें कि क्या याचिकाकर्ता को इस चरण पर टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

    मामले को 14.05.2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।

    Case Title: M/S Associated Jute Industries Thru. Its Partner Shri Aditya Agarwal And Another Versus State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. / Prin. Secy. Deptt. Of Agri. Lko And 2 Others

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