राहुल गांधी नागरिकता विवाद: 'अदालत की छवि धूमिल'- सोशल मीडिया पोस्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार, जज ने खुद को किया अलग

Praveen Mishra

20 April 2026 5:10 PM IST

  • राहुल गांधी नागरिकता विवाद: अदालत की छवि धूमिल- सोशल मीडिया पोस्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार, जज ने खुद को किया अलग

    इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने सोमवार को भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर द्वारा दायर उस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग (recuse) कर लिया, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। यह निर्णय तब आया जब अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा सोशल मीडिया और मीडिया में दिए गए बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई, जिन्हें अदालत ने अपनी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस विद्यार्थी ने मौखिक रूप से कहा कि याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर अदालत के खिलाफ “फाउल प्ले” जैसे आरोप लगाए और इस पूरे प्रकरण को “अनुचित व्यवहार” बताया। उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अदालत को अपने “राजनीतिक अखाड़े” का हिस्सा बना रहे हैं और उन्होंने इस मामले की सुनवाई करने पर “पछतावा” भी व्यक्त किया। अदालत ने कहा कि ऐसे पोस्ट अदालत की छवि को खराब करते हैं और उस पर अनावश्यक आरोप लगाते हैं।

    गौरतलब है कि दो दिन पहले ही अदालत ने अपने 17 अप्रैल के मौखिक आदेश—जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था—को स्थगित कर दिया था और यह विचार किया था कि गांधी को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके लिए अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था ताकि यह तय किया जा सके कि प्रस्तावित आरोपी को नोटिस दिया जाना चाहिए या नहीं।

    इस बीच, याचिकाकर्ता शिशिर ने अदालत में सफाई देते हुए कहा कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट अदालत के खिलाफ नहीं, बल्कि उन लोगों के खिलाफ थे जो उन्हें मामले से पीछे हटने का दबाव बना रहे थे। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि उसे किसी की सराहना की आवश्यकता नहीं है और याचिकाकर्ता अपनी दलीलें अपीलीय अदालत के समक्ष रख सकते हैं।

    मामले की पृष्ठभूमि में, शिशिर ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने एक ब्रिटिश कंपनी “Backops Ltd.” में स्वयं को ब्रिटिश नागरिक बताया था और इसी आधार पर उनके खिलाफ विभिन्न कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, अब न्यायमूर्ति विद्यार्थी के अलग होने के बाद यह मामला मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित किसी अन्य पीठ के समक्ष सुना जाएगा।

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