Prayagraj Waterlogging | हाईकोर्ट का म्युनिसिपल कमिश्नर और DM को निर्देश: निचले इलाकों से बारिश का पानी पंप करके निकाला जाए

Shahadat

20 Aug 2026 9:43 AM IST

  • Prayagraj Waterlogging | हाईकोर्ट का म्युनिसिपल कमिश्नर और DM को निर्देश: निचले इलाकों से बारिश का पानी पंप करके निकाला जाए

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को प्रयागराज के म्युनिसिपल कमिश्नर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि लगातार बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में जमा बारिश का पानी मोरी गेट, दारागंज के रास्ते पंप करके निकाला जाए।

    जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने प्रयागराज में जल-जमाव से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान (suo motu) याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।

    बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार के स्थानीय निकाय निदेशक (Director, Local Bodies) को भी निर्देश दिया कि वे हलफनामा (Affidavit) दाखिल करके बताएं कि शहर को बारिश के पानी और बाढ़ से राहत दिलाने के लिए क्या योजनाएं बनाई गईं।

    यह निर्देश म्युनिसिपल कमिश्नर सीलम साईं तेजा के यह बताने के बाद आया कि मोरी गेट और दारागंज पाइपलाइन के जरिए निचले इलाकों में जमा बारिश का पानी निकालने में दिक्कतें आ रही थीं।

    उन्होंने जमा बारिश का पानी निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आपातकालीन उपाय के तौर पर एक अंतरिम निर्देश की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित इलाकों को 24 से 48 घंटों के भीतर बाढ़ से मुक्त रखने में मदद मिल सकती है।

    इसके बाद कोर्ट ने म्युनिसिपल कमिश्नर को अनुमति दी और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि जमा बारिश का पानी मोरी गेट, दारागंज के रास्ते पंप करके निकाला जाए।

    कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

    "चूंकि इन इलाकों में बाढ़ का पानी जमा हो गया और यहां तक ​​कि लोगों के घरों में भी घुस गया, जिससे भारी समस्याएं हो रही हैं - जिसमें घरों में रहने वाले बच्चों के लिए स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी शामिल हैं - इसलिए हम म्युनिसिपल कमिश्नर को अनुमति देते हैं और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को निर्देश देते हैं कि वे यह पक्का करें कि इन निचले इलाकों में जमा बारिश का पानी, जिसके कारण बाढ़ की स्थिति बनी है, उसे मोरी गेट, दारागंज के रास्ते पंप करके निकाला जाए।"

    कोर्ट ने निर्देश दिया कि बारिश के पानी से बनी बाढ़ की स्थिति के बारे में एक रिपोर्ट 20 अगस्त को उसके सामने पेश की जाए।

    गौरतलब है कि मंगलवार को हाई कोर्ट ने लगातार बारिश के कारण प्रयागराज में जल-जमाव के गंभीर संकट पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए हस्तक्षेप किया था।

    कोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और म्युनिसिपल कमिश्नर को पेश होने और यह बताने का निर्देश दिया कि जल-जमाव, खासकर निचले इलाकों में, को रोकने के लिए पहले से उपाय क्यों नहीं किए गए। बेंच ने उत्तर प्रदेश के शहरी विकास और योजना विभाग के सचिव को एक व्यक्तिगत हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश भी दिया। इसमें उन्हें उन योजनाओं के बारे में बताना था जिन्हें मंज़ूरी दी गई, ताकि यह पक्का किया जा सके कि लगातार बारिश के कारण शहर में जल-जमाव (Waterlogging) न हो।

    कोर्ट ने गौर किया कि इस स्थिति के कारण कामकाज ठप हो रहा था और जजों को कोर्ट पहुँचने में दिक्कतें आ रही थीं, जिससे "न्याय प्रशासन में सीधा दखल" पड़ रहा था।

    इसके अलावा, जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने 'ड्रेनेज मास्टर प्लान' तैयार करने के लिए 20 दिसंबर, 2024 के सरकारी आदेश के तहत नीति को लागू न करने और प्रयागराज में नागरिक सुविधाओं की विफलता का स्वतः संज्ञान (suo motu cognizance) लिया था।

    उस कार्यवाही में शहर के कई इलाकों - जैसे जॉर्ज टाउन, टैगोर टाउन, अल्लापुर, आलोपीबाग, बैरहना, रामबाग और प्रीतम नगर - में भारी जल-जमाव के बारे में जानकारी दर्ज की गई। कोर्ट के ध्यान में यह बात भी लाई गई कि वकील और उनके क्लर्क कोर्ट नहीं पहुँच पा रहे थे और जल-जमाव के कारण केस की फाइलें खराब हो गई थीं।

    कोर्ट ने कहा कि वकीलों और उनके क्लर्कों का कोर्ट न पहुँच पाना और केस के रिकॉर्ड का नष्ट होना "सीधे तौर पर न्याय प्रशासन को प्रभावित करता है।"

    इस मामले की सुनवाई 20 अगस्त, 2026 के लिए तय की गई।

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