Prayagraj Waterlogging | हाईकोर्ट ने प्रभावित इलाकों में पंप लगाने का आदेश दिया, पानी निकालने के लिए 24 घंटे की समय-सीमा तय की

Shahadat

21 Aug 2026 9:43 AM IST

  • Prayagraj Waterlogging | हाईकोर्ट ने प्रभावित इलाकों में पंप लगाने का आदेश दिया, पानी निकालने के लिए 24 घंटे की समय-सीमा तय की

    प्रयागराज में लगातार बारिश के कारण जलभराव की गंभीर समस्या पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दायर जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज प्रयागराज नगर निगम को निर्देश दिया कि वे ज़मीन पर पर्याप्त वॉटर पंप लगाएं ताकि शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या को अगले 24 घंटों के भीतर दूर किया जा सके।

    जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने प्रयागराज में जलभराव और नागरिक सुविधाओं की विफलता से संबंधित स्वतः संज्ञान कार्यवाही की सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।

    कोर्ट ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार करने के लिए राज्य सरकार की 20 दिसंबर, 2024 की नीति को लागू न किए जाने को लेकर भी चिंतित है।

    गौरतलब है कि बुधवार को कोर्ट ने अधिकारियों, खासकर नगर आयुक्त को निर्देश दिया था कि वे निचले और जलभराव वाले इलाकों को 24-48 घंटों के भीतर साफ करें और आपातकालीन उपाय के तौर पर मोरी गेट, दारागंज के माध्यम से जमा बारिश के पानी को पंप करने की अनुमति दी।

    हाईकोर्ट ने जलभराव हटाने के लिए 24 घंटे की समय-सीमा तय की

    गुरुवार को कोर्ट के समक्ष पेश हुए नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा ने बेंच को सूचित किया कि उन्हें उम्मीद है कि निचले इलाकों में जमा बारिश का पानी अगले 4 से 8 घंटों के भीतर पंप करके निकाल दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि रुके हुए बारिश के पानी से स्वास्थ्य संबंधी खतरों को रोकने के लिए साथ-साथ सफाई का काम भी किया जाएगा।

    उन्होंने बेंच को यह भी बताया कि यू.पी. जल निगम (शहरी), प्रयागराज की मदद से विभिन्न स्थानों पर पर्याप्त पंप लगाए गए हैं और बारिश का पानी निकालने की प्रक्रिया चल रही है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारी बारिश के दौरान इस तरह के जलभराव को दोबारा होने से रोकने के लिए आपातकालीन अल्पकालिक योजना और दीर्घकालिक योजना के लिए एक राज्य नीति मौजूद है।

    हालांकि, कोर्ट के समक्ष पेश हुए वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि स्थिति "गंभीर और दयनीय" बनी हुई। बेंच को सूचित किया गया कि कई इलाकों में अभी भी जलभराव है और वकीलों के चैंबर और आवासीय इलाके भी प्रभावित हुए।

    पर्याप्त पंपों और सफाई कार्य की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इसे ध्यान में रखते हुए बेंच ने नगर निगम को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया:

    "...प्रयागराज शहर के उन सभी निचले इलाकों में, जहां भारी बारिश के कारण जल-जमाव की गंभीर स्थिति बनी हुई, नगर निगम सफाई और स्वच्छता का पूरा काम करे। ऐसा इसलिए किया जाए ताकि इस आपातकालीन स्थिति के कारण स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या पैदा न हो।"

    नगर आयुक्त को विशेष रूप से निर्देश दिया गया कि वे यह सुनिश्चित करें कि जहां भी जल-जमाव की समस्या बनी हुई, वहां पर्याप्त पंप लगाए जाएं और अगले 24 घंटों के भीतर बारिश का पानी बाहर निकाल दिया जाए।

    अदालत ने आगे निर्देश दिया कि आवश्यक पंप यू.पी. जल निगम (शहरी), प्रयागराज से प्राप्त किए जाएं। यदि जल निगम के पास पर्याप्त पंप नहीं हैं तो राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह 12 घंटों के भीतर आवश्यक संख्या में पंप उपलब्ध कराए।

    नगर आयुक्त को यह भी निर्देश दिया गया कि वे 2-3 घंटों के भीतर स्थिति का आकलन करें और आवश्यक पंपों की व्यवस्था करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह अगली सुनवाई में यह नहीं सुनना चाहती कि शहर के निचले इलाकों में अभी भी जल-जमाव है।

    अदालत ने नगर आयुक्त को अनुपालन का व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया, जिसमें लगातार बारिश के कारण जल-जमाव का सामना करने वाले प्रयागराज के हिस्सों का वार्ड-वार और क्षेत्र-वार विवरण हो।

    अदालत ने उन नालियों का विवरण भी मांगा, जो किसी भी कारण से अभी भी बंद हैं और यह भी पूछा है कि क्या मानसून के आगमन से पहले हाल ही में नालियों की गाद निकालने (डीसिल्टिंग) का काम किया गया था।

    कोर्ट ने खास तौर पर जवाहर लाल नेहरू रोड, जॉर्ज टाउन और सोहबतियाबाग के रेलवे पुल के नीचे से गुजरने वाले अंडरग्राउंड नाले से गाद (silt) हटाने की योजना की जानकारी मांगी।

    उल्लेखनीय है कि एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने बेंच के सामने उत्तर प्रदेश सरकार के शहरी योजना और विकास विभाग के सचिव का एक पर्सनल हलफनामा पेश किया। इसके साथ ही 20 दिसंबर, 2024 के नोटिफिकेशन के तहत जारी निर्देश भी पेश किए गए, जो जलभराव को रोकने और तूफानी पानी (storm-water) के मैनेजमेंट की लंबी अवधि की योजना से जुड़े थे।

    कोर्ट को यह भी बताया गया कि प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव की अध्यक्षता में एक शीर्ष-स्तरीय कमेटी बनाई गई और उसकी बैठक का ब्योरा रिकॉर्ड पर रखा गया।

    इन बातों पर विचार करते हुए बेंच ने राय दी कि ये अल्पकालिक उपाय शायद यह पक्का करने के लिए काफी न हों कि प्रयागराज शहर को भविष्य में ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

    बेंच ने आगे कहा कि नालों से गाद हटाना, नए नाले बनाना और बारिश के पानी की निकासी के लिए केंद्रीय क्षेत्र का विकास करना एक लंबी प्रक्रिया वाली योजना होगी और यह व्यापक जनहित का मामला होगा।

    इसे देखते हुए कोर्ट ने कार्यवाही में मदद के लिए सीनियर एडवोकेट राकेश पांडे को 'एमिक्स क्यूरी' (न्याय मित्र) नियुक्त किया।

    यह देखते हुए कि मामला "प्रयागराज के नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले व्यापक जनहित" से जुड़ा है, बेंच ने प्रभावित लोगों और जो लोग कोर्ट के सामने योजनाएं या सुझाव रखना चाहते हैं, उन्हें 'एमिक्स क्यूरी' के माध्यम से ऐसा करने की अनुमति दी।

    म्युनिसिपल कमिश्नर को अनुपालन (Compliance) का एक नया पर्सनल हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया; ऐसा न करने पर उन्हें कोर्ट के सामने पेश होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त, 2026 को दोपहर 2 बजे तय की गई।

    इससे पहले, 18 अगस्त को हाईकोर्ट ने प्रयागराज शहर में लगातार बारिश के कारण हुए जलभराव का स्वतः संज्ञान (suo moto note) लिया था। बेंच को बताया गया कि इस समस्या ने प्रयागराज के कई हिस्सों को प्रभावित किया है और वकील व उनके क्लर्क कोर्ट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

    कोर्ट ने कहा कि वकीलों और उनके क्लर्कों का कोर्ट तक न पहुंच पाना और केस के रिकॉर्ड का नष्ट होना "सीधे तौर पर न्याय प्रशासन को प्रभावित करता है।"

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