पहलगाम पोस्ट केस: डॉ. मेडुसा पर गंभीर आरोप, 'एकता खतरे' की धारा हटाई, 352 और 302 BNS बरकरार

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    उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. मद्री ककोटी (डॉ. मेडुसा) के खिलाफ पहलगाम आतंक हमले के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट पर FIR की जांच पूरी हो गई है और जल्द ही चार्जशीट दायर की जाएगी।

    राज्य के वकील ने बताया कि पहले FIR में कई धाराएं थीं, जैसे धारा 152 BNS (भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम) लेकिन अब चार्जशीट में केवल धारा 352 (जानबूझकर अपमान और शांति भंग करने के लिए) और 302 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए) शामिल हैं।

    इस वजह से डॉ. ककोटी की अग्रिम जमानत याचिका को निपटाया गया।

    FIR में कहा गया कि डॉ. ककोटी ने ट्विटर पर भारत की एकता और संप्रभुता पर हमला किया, देश में दंगे फैलाने की कोशिश की, और उनके पोस्ट पाकिस्तान के मीडिया चैनलों पर भी शेयर किए गए।

    जांच में पाया गया कि FIR में पहले शामिल कुछ धाराओं (197, 353, 196, 152 BNS और 69-A IT Act) में अपराध नहीं पाया गया, इसलिए उन्हें हटा दिया गया।

    चार्जशीट अब पुलिस द्वारा असिस्टेंट कमिश्नर को भेजी गई है और ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी।

    न्यायालय ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट 10 दिनों के अंदर अदालत में जमा की जाए।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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