Oudh Bar Elections | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिसर में पोस्टर लगाने, खाना बांटने और जुलूस निकालने पर लगाई रोक
Shahadat
22 Sept 2026 7:32 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवध बार एसोसिएशन के 2026-27 के चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को निर्देश दिया कि वे चुनाव के सिलसिले में हाई कोर्ट परिसर के अंदर पोस्टर या स्टिकर न लगाएं, जुलूस न निकालें और खाने-पीने की चीजें न बांटें।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने उम्मीदवारों को हाईकोर्ट परिसर के अंदर और कोर्ट परिसर के बाहर 100 मीटर के दायरे में बार के सदस्यों को हैंडबिल और पैम्फलेट बांटने से भी रोक दिया।
ये निर्देश WPIL नंबर 177/2026 में पहले दिए गए आदेश में बदलाव की मांग करने वाली एक अर्जी पर विचार करते हुए जारी किए गए।
इस अर्जी में उम्मीदवारों को हाई कोर्ट परिसर के अंदर या बाहर स्टिकर, बैनर या होर्डिंग लगाने से रोकने की मांग की गई। इसमें टेंट लगाकर सड़कें रोकने और कोर्ट परिसर के अंदर, खासकर चुनाव के दिन, खाने-पीने की चीजें बांटने से रोकने के निर्देश भी मांगे गए।
यह तर्क दिया गया कि ऐसा व्यवहार "न केवल इमारत/परिसर की सुंदरता को खराब करता है, बल्कि यह किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है"।
हालांकि, बेंच ने कहा कि चूंकि संबंधित PIL पर पहले ही फैसला हो चुका है, इसलिए "इन री: कंडक्ट ऑफ इलेक्शंस टू द अवध बार एसोसिएशन" (अवध बार एसोसिएशन के चुनाव कराने के मामले में) शीर्षक के साथ एक अलग 'स्वतः संज्ञान' (Suo Motu) PIL दर्ज करना उचित होगा।
इस PIL को अवध बार एसोसिएशन के चुनाव कराने से जुड़ी 2021 की एक PIL के साथ 29 सितंबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश देते हुए कोर्ट ने हाईकोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार को जांच करने और हाईकोर्ट परिसर के अंदर और बाहर संबंधित हिस्सों की तस्वीरें लेने और वीडियोग्राफी कराने का निर्देश दिया।
इस जांच का मकसद दीवारों और अन्य जगहों पर लगाए गए पोस्टरों, स्टिकर आदि का पता लगाना और इस संबंध में कोर्ट को रिपोर्ट सौंपना है, जिसमें उन उम्मीदवारों के नाम और अन्य विवरण शामिल हों, जिनके पोस्टर आदि लगाए गए।
हाईकोर्ट ने 'अमित सचान बनाम बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया, जो अवध बार एसोसिएशन के चुनावों के संबंध में 2021 में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों से जुड़ा था। अन्य बातों के अलावा, पहले दिए गए निर्देशों में 'एल्डर्स कमेटी' से चुनाव के लिए आचार संहिता बनाने को कहा गया और विज़िटिंग कार्ड, कार्ड, पैम्फलेट या पोस्टर के ज़रिए प्रचार करने पर रोक लगाई गई।
चुनाव से पहले या चुनाव के दौरान लंच पैकेट, रिफ्रेशमेंट और ऐसी ही दूसरी चीज़ें बांटने पर भी रोक थी। पहले के निर्देशों में यह भी कहा गया कि जो सदस्य ऐसी चीज़ें बांटते हुए पाए जाएंगे, उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है।
हाईकोर्ट ने ध्यान दिलाया कि उन निर्देशों को चुनौती देने वाली एक 'स्पेशल लीव पिटिशन' सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई, जिसे बाद में खारिज कर दिया गया और हाईकोर्ट के निर्देशों व टिप्पणियों को मंज़ूरी दी गई।
बेंच ने 'आर. मुथुकृष्णन बनाम रजिस्ट्रार जनरल, मद्रास हाईकोर्ट' मामले में सुप्रीम कोर्ट की उन टिप्पणियों का भी ज़िक्र किया, जिनमें बार के सदस्यों से अपेक्षित आचरण के बारे में बताया गया।
मौजूदा आदेश में बताए गए सुप्रीम कोर्ट के रुख के मुताबिक, कोर्ट परिसर में जुलूस निकालने, नारेबाज़ी करने, लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने या ऐसा कोई भी काम करने की कोई गुंजाइश नहीं है जिससे कोर्ट के शांतिपूर्ण, सम्मानजनक और गरिमापूर्ण कामकाज में बाधा आए।
इसे ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने उन सभी उम्मीदवारों को निर्देश दिया, जिनके पोस्टर या स्टिकर हाई कोर्ट परिसर के अंदर या बाहर कहीं भी लगाए गए, कि वे उन्हें तुरंत हटाने के उपाय करें।
कोर्ट ने आगे यह भी निर्देश दिया कि कोई भी उम्मीदवार:
• अवध बार चुनाव के सिलसिले में हाईकोर्ट परिसर के अंदर जुलूस नहीं निकालेगा।
• परिसर के अंदर खाने-पीने की चीज़ें नहीं बांटेगा।
• हाईकोर्ट परिसर के अंदर और परिसर के बाहर 100 मीटर के दायरे में बार के सदस्यों को हैंडबिल और पैम्फलेट नहीं बांटेगा।
कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने पर उम्मीदवार को चुनाव के लिए विचार किए जाने से रोक दिया जाएगा और इसके अन्य परिणाम भी हो सकते हैं, जैसे कि मामले को बार काउंसिल को भेजा जा सकता है या कोर्ट कोई अन्य ज़रूरी कार्रवाई कर सकता है।
सुनवाई के दौरान, बार के सदस्यों ने सुझाव दिया कि "अपने उम्मीदवार को जानें" (KYC) कार्यक्रम, जो पिछले चुनाव के दौरान आयोजित किया गया, उसे फिर से आयोजित किया जा सकता है।
इस कार्यक्रम के तहत अलग-अलग पदों के लिए चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार अवध बार एसोसिएशन के सदस्यों को संबोधित करते थे, जिससे सदस्यों को वोट देने से पहले उम्मीदवारों के बारे में जानने का मौका मिलता था।
रिटर्निंग ऑफिसर आर.बी.एस. राठौर, जो कोर्ट में मौजूद थे, ने कहा कि वह इस सुझाव पर विचार करेंगे और ज़रूरी कदम उठाएंगे।
सदस्यों ने यह भी सुझाव दिया कि उम्मीदवार के बजाय रिटर्निंग ऑफिसर या एल्डर्स कमेटी बार के फंड का इस्तेमाल करके वोटिंग के दिन वोटरों को खाना उपलब्ध करा सकती है। रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा कि वह एल्डर्स कमेटी के साथ सलाह-मशविरा करके इस सुझाव पर विचार करेंगे।
इस मामले पर अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
Case title - In Re: Conduct of Elections to the Oudh Bar Association

