IVF इलाज का फेल होना धोखाधड़ी का अपराध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामला खारिज किया
Shahadat
2 Nov 2026 8:26 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि IVF प्रक्रिया का सफल न होना, अपने आप में धोखाधड़ी का इरादा नहीं माना जा सकता और न ही यह IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध बनता है।
जस्टिस चवन प्रकाश की बेंच ने कहा कि किसी समझौते के टूटने या मेडिकल इलाज के फेल होने और धोखाधड़ी के अपराध के बीच स्पष्ट अंतर है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आरोपी का इरादा क्या था।
कोर्ट ने आगे कहा कि IVF इलाज की पेशकश को गर्भावस्था की कानूनी गारंटी नहीं माना जा सकता, क्योंकि ऐसी प्रक्रियाओं में शारीरिक कारणों से फेल होने की संभावना हमेशा बनी रहती है।
इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने एक महिला फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। उन्होंने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें IPC की धारा 420 के तहत ट्रायल का सामना करने के लिए बुलाया गया था।
मामले का संक्षिप्त विवरण
यह शिकायत जयवीर सिंह ने दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि शादी के बाद से उनकी पत्नी गर्भवती नहीं हो पा रही थीं, इसलिए वह उन्हें बुलंदशहर के 'तेवतिया हॉस्पिटल एंड फर्टिलिटी सेंटर' में डॉ. तेवतिया (आवेदक) के पास IVF इलाज के लिए ले गए।
शिकायत के अनुसार, डॉक्टर ने कहा कि वह IVF के जरिए उनकी पत्नी को गर्भवती होने में मदद कर सकती हैं। इसके लिए 3.5 लाख रुपये मांगे। शिकायतकर्ता ने यह रकम किश्तों में चुका दी। हालांकि, आरोप है कि डॉक्टर ने केवल 1.6 लाख रुपये की ही रसीद दी।
यह भी आरोप लगाया गया कि इलाज के बावजूद उनकी पत्नी गर्भवती नहीं हुईं। जब शिकायतकर्ता ने डॉक्टर से अपने पैसे वापस मांगे तो उन्होंने बार-बार टालमटोल किया और अंत में पैसे देने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कथित तौर पर कहा,
"हम इसी तरह पैसे कमाते हैं: लोगों को गुमराह करके। हमारी ऊंची जगहों पर अच्छी जान-पहचान है।"
स्थानीय पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने का आरोप लगाते हुए सिंह ने CrPC की धारा 156(3) के तहत संबंधित कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मजिस्ट्रेट ने CrPC की धारा 200 के तहत उनका बयान दर्ज किया, और CrPC की धारा 202 के तहत उनकी पत्नी व एक अन्य गवाह का बयान लिया। इसके बाद, उन्होंने डॉक्टर (आवेदक) को IPC की धारा 420 के तहत तलब किया।
इस आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देते हुए डॉक्टर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
Case Title : Dr. Sarita Teotia vs. State of U.P. and Another 2026 LiveLaw (AB) 911

