NCR के पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरे ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिटेलर्स पर खर्च का बोझ डालने के राज्य सरकार के अधिकार पर सवाल उठाए

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते सवाल उठाया कि क्या नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में पेट्रोल और डीज़ल रिटेल आउटलेट मालिकों को 'एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन' (CAQM) के निर्देशों के तहत राज्य सरकार के आदेश के अनुसार 'ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' (ANPR) कैमरे लगाने का खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

    जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा कि 'गंभीर' मुद्दा यह है कि क्या राज्य सरकार का 4 जून, 2026 का पत्र, जिसमें पेट्रोल और डीज़ल रिटेल आउटलेट्स को 30 सितंबर, 2026 तक ANPR कैमरे लगाने के लिए कहा गया है, रिटेल आउटलेट मालिकों को अपने खर्च पर कैमरे लगवाने के लिए भी बाध्य करता है।

    कोर्ट पेट्रोल और डीज़ल रिटेल आउटलेट मालिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले 'उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन' की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

    बता दें, 'एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन' ने 15 मई, 2026 को निर्देश जारी किए थे, जिनमें NCR में वैध PUCC के बिना वाहनों में ईंधन भरने पर प्रतिबंध लगाया गया।

    ये कैमरे अधिकारियों को पेट्रोल पंप में प्रवेश करने वाले वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर की सरकारी रिकॉर्ड से जांच करने की सुविधा देते हैं।

    याचिकाकर्ता का पक्ष

    याचिकाकर्ताओं ने कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत राज्य सरकार या तेल कंपनियाँ रिटेल आउटलेट मालिकों को कैमरे लगाने का खर्च उठाने के लिए मजबूर कर सकें।

    याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उन्हें ANPR कैमरे लगाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें इसके इंस्टॉलेशन का खर्च उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

    'उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन' ने तर्क दिया कि रिटेल आउटलेट मालिकों से खर्च उठाने के लिए कहना "अनिवार्य रूप से पैसे की वसूली" के समान है, जो उनके अनुसार संविधान के अनुच्छेद 300A और 265 का उल्लंघन होगा।

    हाईकोर्ट का आदेश

    हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को 'गंभीर' माना क्योंकि उसने सवाल उठाया कि क्या NCR में CAQM के निर्देशों को लागू करने वाला राज्य सरकार का पत्र रिटेल आउटलेट मालिकों को अपने खर्च पर ANPR कैमरे लगाने के लिए बाध्य कर सकता है। राज्य सरकार की ओर से पेश हुए स्टैंडिंग काउंसेल ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (प्रतिवादी नंबर 15) की ओर से पेश वकील ने भी निर्देश लेने के लिए समय मांगा।

    याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि अधिकारी और तेल कंपनियां, रिटेल आउटलेट्स पर ANPR कैमरे लगाने की 30 सितंबर की समय-सीमा को देखते हुए सख़्त कार्रवाई की धमकी दे रहे थे।

    इन हालात में कोर्ट ने निर्देश दिया,

    "05.10.2026 तक प्रतिवादी याचिकाकर्ता एसोसिएशन के सदस्यों के खिलाफ़ उनके रिटेल आउटलेट्स पर ANPR कैमरे लगाने को लेकर कोई सख़्त कार्रवाई नहीं करेंगे।"

    हालांकि, कोर्ट ने साफ़ किया कि अगर राज्य सरकार अपने खर्च पर ANPR कैमरे लगाती है, तो याचिकाकर्ता एसोसिएशन के सदस्य तुरंत कैमरे लगाने में सहयोग करेंगे।

    रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया गया कि वे इस आदेश की जानकारी खाद्य और नागरिक आपूर्ति और परिवहन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, कई NCR ज़िलों के ज़िला अधिकारियों और तेल कंपनियों (जिनमें भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड शामिल हैं) के क्षेत्रीय अधिकारियों को दें।

    ध्यान दें, कोर्ट ने निर्देश लेने के लिए 3 दिन का समय दिया और मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर तक के लिए टाल दी थी। हालांकि, 5 अक्टूबर को मामला जस्टिस प्रकाश पाडिया वाली बेंच के सामने लिस्ट हुआ, जिन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

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