Land Acquisition Act, 1894 | रेफरेंस कोर्ट कलेक्टर का अवार्ड रद्द नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Shahadat
19 April 2026 11:30 AM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत रेफरेंस कोर्ट को कलेक्टर द्वारा दिए गए मुआवजे का अवार्ड रद्द करने या कलेक्टर द्वारा नए सिरे से निर्धारण किए जाने का आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा केवल एक अपीलीय कोर्ट ही कर सकती है।
यह देखते हुए कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 अपने आप में एक पूर्ण संहिता है, जस्टिस संदीप जैन ने कहा,
“भूमि अधिग्रहण अधिनियम में केवल यह उल्लेख है कि यदि भूमि मालिक कलेक्टर द्वारा दिए गए मुआवजे की राशि से संतुष्ट नहीं है तो वह कलेक्टर के माध्यम से मामले को रेफरेंस कोर्ट में भेजवा सकता है, जो तब कानून के अनुसार मुआवजे का निर्धारण करेगी। यह अधिनियम रेफरेंस कोर्ट को कलेक्टर का अवार्ड रद्द करने और मुआवजे का नए सिरे से निर्धारण करने के लिए मामले को वापस भेजने का अधिकार नहीं देता है। यह स्पष्ट है कि मामले को वापस भेजने (रिमांड) का अधिकार केवल अपीलीय कोर्ट द्वारा ही प्रयोग किया जाता है, लेकिन यह भली-भांति स्थापित है कि रेफरेंस कोर्ट कोई अपीलीय कोर्ट नहीं है, बल्कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे का निर्धारण करने के लिए केवल एक मूल कोर्ट है।”
अपीलकर्ता ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्राधिकरण के पीठासीन अधिकारी के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। उक्त अधिकारी ने अधिनियम के तहत रेफरेंस कोर्ट के रूप में कार्य करते हुए कलेक्टर द्वारा दिए गए अवार्ड को आंशिक रूप से रद्द किया और मुआवजे के नए सिरे से निर्धारण के लिए मामले को वापस भेज दिया।
रेफरेंस कोर्ट ने इस आधार पर रेफरेंस को स्वीकार कर लिया था कि कलेक्टर को 1894 के अधिनियम के बजाय 2013 के अधिनियम के तहत मुआवजे का निर्धारण करना चाहिए।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894, जो अपने आप में एक पूर्ण संहिता है, उसमें कलेक्टर के अधिकारों और कलेक्टर द्वारा दिए गए अवार्ड को किस प्रकार चुनौती दी जा सकती है, इसका प्रावधान किया गया। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि रेफरेंस कोर्ट के पास अवार्ड का नए सिरे से निर्धारण करने का अधिकार तो है, लेकिन उसे रद्द करने और नए सिरे से निर्णय लेने के लिए कलेक्टर को वापस भेजने का अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने यह भी फैसला सुनाया कि 'भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' के तहत भी रेफरेंस कोर्ट को मुआवजे का अवार्ड रद्द करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
कोर्ट ने इस संदर्भ में कहा,
“यह स्पष्ट है कि Reference Court ने Collector का Award रद्द करके और मामले को नए सिरे से तय करने के लिए वापस भेजकर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया, जो Land Acquisition Act, 1894 और साथ ही 2013 के Act के प्रावधानों के विपरीत है। किसी भी परिस्थिति में Reference Court यह विवादित आदेश पारित नहीं कर सकती थी, जो कानून की नज़र में मान्य नहीं है।”
तदनुसार, अपील स्वीकार की गई और Reference Court को निर्देश दिया गया कि वह मामले को उसके गुण-दोष के आधार पर तय करे।
Case Title: State Of Up And 2 Others v. Iftekhar Ahmad And Another 2026 LiveLaw (AB) 229

