अनुशासनात्मक कार्रवाई की समय-सीमा कोर्ट खुद बढ़ा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला
Amir Ahmad
23 March 2026 12:23 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि गंभीर कदाचार के मामलों में सजा से बचने की स्थिति न बने, इसके लिए अदालत अपने आप (स्वतः संज्ञान लेते हुए) अनुशासनात्मक कार्यवाही की तय समय-सीमा बढ़ा सकती है।
जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि यदि नियोक्ता समय बढ़ाने के लिए कोर्ट नहीं भी जाता है तब भी अदालत मामले की सुनवाई करते समय परिस्थितियों का आकलन कर सकती है और आवश्यक होने पर समय-सीमा बढ़ा सकती है।
कोर्ट ने कहा,
“ऐसे मामलों में जहां कार्यवाही तय समय में पूरी नहीं हो पाती अदालत को यह देखना चाहिए कि देरी किन कारणों से हुई। यदि आरोप गंभीर है तो समय-सीमा बढ़ाकर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कदाचार बिना सजा के न रह जाए।”
यह टिप्पणी अदालत ने अपने ही पूर्व फैसले 'अभिषेक प्रभाकर अवस्थी बनाम न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड' के संदर्भ में की जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया था।
मामला उन्नाव में तैनात एक वाणिज्य कर अधिकारी से जुड़ा था। GST जांच के दौरान अनियमितताएं मिलने के बावजूद उन्होंने रिपोर्ट नहीं की, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई।
अधिकारी ने अपने निलंबन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। तब अदालत ने 29 सितंबर, 2021 को आदेश दिया कि दो महीने के भीतर जांच पूरी की जाए अन्यथा निलंबन स्वतः समाप्त माना जाएगा। हालांकि जांच बाद में पूरी हुई और मई, 2022 में सजा का आदेश जारी किया गया।
इस आदेश को राज्य लोक सेवा अधिकरण ने रद्द कर दिया, जिसके खिलाफ राज्य सरकार हाईकोर्ट पहुंची।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले दिए गए आदेश में तय समय-सीमा केवल निलंबन से जुड़ी थी न कि पूरी अनुशासनात्मक कार्यवाही को समाप्त करने के लिए। इसलिए दो महीने के बाद भी जांच जारी रह सकती थी।
साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि हर मामले में समय-सीमा बढ़ाने का फैसला परिस्थितियों और आरोपों की गंभीरता को देखकर ही किया जाना चाहिए।
हालांकि, कोर्ट ने यह पाया कि संबंधित अधिकारी द्वारा दिए गए जवाब पर विचार किए बिना ही सजा का आदेश पारित कर दिया गया था जो उचित नहीं है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मामले को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए अनुशासनात्मक प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह अधिकारी के जवाब पर विचार कर नए सिरे से निर्णय ले।

