योग्य और कमाने में सक्षम पत्नी केवल पति पर बोझ डालने के लिए काम न करे तो भरण-पोषण नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Amir Ahmad

29 April 2026 11:56 AM IST

  • योग्य और कमाने में सक्षम पत्नी केवल पति पर बोझ डालने के लिए काम न करे तो भरण-पोषण नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई शिक्षित और कमाने में सक्षम पत्नी केवल पति पर आर्थिक बोझ डालने के उद्देश्य से काम करने से परहेज करती है तो अदालतें हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम भरण-पोषण देने से इनकार कर सकती हैं।

    जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक महिला द्वारा दायर प्रथम अपील खारिज करते हुए की। महिला पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और उन्होंने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके अंतरिम भरण-पोषण का आवेदन अस्वीकार किया गया था।

    प्रयागराज के फैमिली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत महिला की अंतरिम भरण-पोषण याचिका खारिज की थी। हालांकि बच्चों के लिए धारा 26 के तहत भरण-पोषण मंजूर किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार महिला की आयकर विवरणियों से उसकी वार्षिक आय 31 लाख रुपये से अधिक पाई गई।

    हाईकोर्ट में महिला ने दलील दी कि वह फिलहाल कार्यरत नहीं हैं क्योंकि पति द्वारा मुकदमा दायर किए जाने के बाद उन्हें अस्पताल से हटा दिया गया। उनका कहना था कि अलगाव से पूर्व जिस जीवनस्तर पर वह रह रही थीं उसे बनाए रखने के लिए पति से आर्थिक सहायता पाने की वह हकदार हैं।

    वहीं पति पेशे से न्यूरोसर्जन हैं। उसने कहा कि वह बच्चों के लिए पहले से 60 हजार रुपये प्रतिमाह दे रहे हैं और उनकी पत्नी प्रशिक्षित विशेषज्ञ स्त्री रोग डॉक्टर हैं, जो स्वयं पर्याप्त आय अर्जित करने में सक्षम हैं।

    हाईकोर्ट ने महिला की योग्यता और पेशेवर क्षमता पर विचार करते हुए कहा कि वह अपने विशेषज्ञता क्षेत्र में पर्याप्त आय अर्जित कर सकती हैं और उनके पास आत्मनिर्भर बनने की पूरी क्षमता है।

    अदालत ने कहा,

    “जहां कोई योग्य व्यक्ति अपनी विशेषज्ञता के आधार पर पर्याप्त आय अर्जित करने में सक्षम हो। फिर भी केवल पति पर बोझ डालने के लिए काम न करे, वहां धारा 24 के तहत भरण-पोषण से इनकार किया जा सकता है।”

    इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने माना कि फैमिली कोर्ट के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है और महिला की अपील खारिज की।

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