इलाहाबाद हाईकोर्ट ने IIT Rorkee के खिलाफ 47 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज की मांग पर रोक लगाई

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने IIT Rorkee के खिलाफ 47 करोड़ रुपये सर्विस चार्ज की मांग पर रोक लगाई

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की को नगर निगम, सहारनपुर द्वारा उठाए गए 47,06,67,775/- रुपये के सेवा शुल्क की मांग के खिलाफ अंतरिम राहत दी है।

    नगर निगम, सहारनपुर के नगर आयुक्त ने आईआईटी रोड़की द्वारा वर्ष 2012 से वर्ष 2024-2025 तक पूर्वव्यापी रूप से 3,26,43,795/- रुपये प्रति वर्ष सेवा शुल्क लगाने के खिलाफ कुछ मांग नोटिस उठाए, जिसकी कुल राशि 47,06,67,775/- रुपये है।

    याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि मांग नोटिस भारत सरकार, वित्त मंत्रालय के एक कार्यालय ज्ञापन पत्र संख्या 4 (7) -पी/65 दिनांक 29.03.1967 के आधार पर जारी किए गए थे, जहां 'संघ की संपत्तियों' के लिए सेवा शुल्क की वसूली प्रदान की गई थी, जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 285 के तहत राज्य कराधान से छूट दी गई थी।

    बनारस हिंदू विश्वविद्यालय बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य पर भरोसा किया गया था, जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इसी तरह के विवाद में कहा था कि कार्यालय ज्ञापन केवल संघ और उसकी संपत्तियों पर लागू होता है, जबकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर और अन्य विश्वविद्यालय केंद्र सरकार अधिनियम के तहत वैधानिक निकाय हैं, उनकी एक अलग पहचान है और उन्हें संघ के रूप में नहीं माना जा सकता है। यह माना गया कि हालांकि ऐसे संस्थानों पर सेवा शुल्क नहीं लगाया जा सकता है, लेकिन नगरपालिका कर विशिष्ट नगर निगमों के अधिनियमों के तहत लगाए जा सकते हैं।

    इसके अलावा, यह कहा गया था कि "शैक्षणिक संस्थान नगर निगमों द्वारा कर लगाने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं और न ही याचिकाकर्ता-संस्थान द्वारा नगर निगम की किसी भी सेवा का लाभ उठाया जा रहा है और इसलिए, मांग भी अनुचित है।

    जस्टिस अंजनी कुमार मिश्रा और जस्टिस जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने पक्षकारों को हलफनामे का आदान-प्रदान करने का निर्देश देते हुए निर्देश दिया कि नोटिस के अनुसार संस्थान से कोई वसूली नहीं की जाएगी।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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