Hookah Bars | फ़ूड सेफ़्टी डिपार्टमेंट और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन लाइसेंस जारी नहीं कर सकते, पुलिस COTPA लागू कर सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Shahadat
29 Sept 2026 3:57 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में हुक्का बार के लिए लाइसेंस जारी करने या उन्हें रेगुलेट करने का अधिकार न तो फ़ूड सेफ़्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के पास है और न ही म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पास।
हालांकि, बेंच ने साफ़ किया कि 'सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन पर रोक और व्यापार, वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का नियमन) अधिनियम, 2003' (COTPA) के तहत पुलिस को उन प्रतिष्ठानों की तलाशी लेने, उन्हें ज़ब्त करने और जुर्माना लगाने का अधिकार है जो इस कानून का उल्लंघन करते हैं।
जस्टिस शेखर बी. सराफ़ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा:
"इस तर्क पर बहस करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह साफ़ है कि FSSA केवल इंसानों के खाने-पीने की चीज़ों (जिनसे पोषण मिलता है) और मुख्य खाद्य पदार्थों से संबंधित है, जबकि तंबाकू उत्पादों का सेवन न तो पोषण के लिए किया जाता है और न ही वे मुख्य खाद्य पदार्थ हैं। इसके अलावा, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पास अलग से हुक्का लाइसेंस जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए हमारा मानना है कि म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत काम करने वाले अधिकारियों के पास हुक्का बार के संचालन को रेगुलेट करने का कोई अधिकार नहीं है।"
'फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' के तहत फ़ूड सर्विस रेस्तरां लाइसेंस रखने वाले पचास से ज़्यादा प्रतिष्ठानों ने शिकायत की कि पुलिस उन्हें अपने परिसर में तय स्मोकिंग एरिया में हुक्का बार चलाने से रोक रही थी।
यह शिकायत पुलिस की छापेमारी और एडिशनल कमिश्नर ऑफ़ पुलिस द्वारा CrPC की धारा 133 के तहत जारी प्रिवेंटिव ऑर्डर के बाद आई, जिसमें कहा गया कि हुक्का बार बिना लाइसेंस के चल रहे हैं और नाबालिगों को हुक्का परोसा जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि 2006 के अधिनियम की धारा 31 के तहत लाइसेंसिंग स्कीम में केवल फ़ूड बिज़नेस ऑपरेटरों के लिए लाइसेंस की ज़रूरत होती है, जिससे फ़ूड सेफ़्टी अधिकारियों का काम खाने-पीने की जगह के अंदर खाने से जुड़ी गतिविधियों तक सीमित रहता है। साथ ही स्मोकिंग एरिया एक सहायक सुविधा है, जो म्युनिसिपल लाइसेंसिंग कानूनों के बजाय तंबाकू-विशिष्ट कानूनों के तहत आती है।
उन्होंने तर्क दिया कि म्युनिसिपल अधिकारियों का अलग हुक्का लाइसेंस के लिए ज़ोर देना कानूनी रूप से सही नहीं है और यह अधिकार का गलत इस्तेमाल है, दोनों तरह के अधिकारियों ने अपने काउंटर हलफ़नामे में माना कि उनके पास अधिकार क्षेत्र नहीं है। पुलिस के मामले में यह दलील दी गई कि 2003 के एक्ट की धारा 12 के तहत तलाशी लेने की शक्ति तभी मिलती है, जब सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के रैंक का कोई अधिकारी किसी खास अपराध के होने का शक होने का कारण दर्ज करे; इसलिए सिर्फ़ स्मोकिंग एरिया होने के आधार पर ही रेड नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने अधिकार-क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) के मामले में सहमति जताई, लेकिन पुलिस की शक्तियों के बारे में दी गई दलील को पूरी तरह खारिज किया।
आगे कहा गया,
“COTPA के प्रावधान, खासकर धारा 12, 13 और 15, साफ तौर पर दिखाते हैं कि पुलिस अधिकारियों को धारा 4 के आदेश का पालन सुनिश्चित करने की शक्ति दी गई। इस पालन में तलाशी लेने, ज़ब्त करने, सामान ज़ब्त करने और आदेश न मानने वाले प्रतिष्ठानों पर जुर्माना लगाने की शक्ति भी शामिल है।”
कोर्ट ने दर्ज किया कि कुछ रेड में प्रतिष्ठानों के परिसर में खुली जगहों पर हुक्का-तंबाकू का सेवन करते हुए पाया गया। साथ ही एक्ट की धारा 6 की पूरी तरह अनदेखी करते हुए नाबालिगों को हुक्का परोसा जा रहा था; यह धारा अठारह साल से कम उम्र के लोगों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर रोक लगाती है।
सामने आए सिद्धांतों को बताते हुए कोर्ट ने दर्ज किया:
“उत्तर प्रदेश राज्य में हुक्का बार को रेगुलेट करने के लिए लाइसेंस जारी करने का अधिकार-क्षेत्र न तो खाद्य और सुरक्षा विभाग के पास है और न ही नगर निगम के पास।”
यह भी मानते हुए कि 'सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम, 2008' (2017 में संशोधित) के नियम 4(3) के तहत तय स्मोकिंग एरिया में हुक्का परोसना पूरी तरह प्रतिबंधित है, कोर्ट ने सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया और निर्देश दिया कि फैसले की एक कॉपी मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को भेजी जाए।
Case Title - M/s Aftek Foods and Beverages Pvt. Ltd. Thru. Auth. Signatory Vishnu Kumar Gupta and another vS. State of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Deptt. of Food Safety and Drug Admin. U.P. Lko. and others

