पश्चिमी यूपी में 'गैंग' मौत के बिस्तर पर पड़े लोगों का इंश्योरेंस करवा रहा है, पुलिस सहयोग नहीं कर रही: HDFC Life ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बताया

Shahadat

22 March 2026 8:38 PM IST

  • पश्चिमी यूपी में गैंग मौत के बिस्तर पर पड़े लोगों का इंश्योरेंस करवा रहा है, पुलिस सहयोग नहीं कर रही: HDFC Life ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बताया

    HDFC Life Insurance Company ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक संगठित गैंग काम कर रहा है, जो उन लोगों के लिए जीवन बीमा पॉलिसी हासिल करने में कामयाब हो जाता है, जो पहले से ही मौत के बिस्तर पर पड़े हैं या जिनकी मौत हो चुकी है।

    कंपनी ने यह भी बताया कि शिकायतें मिलने के बावजूद, इनमें से ज़्यादातर मामलों में पुलिस निष्पक्ष जांच करके दोषियों को सज़ा दिलाने में सहयोग नहीं करती है।

    यह बात जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच के सामने रखी गई, जिसने हाल ही में बिचौलियों के ज़रिए "मौत के बिस्तर" पर पड़े लोगों को जीवन बीमा पॉलिसी जारी किए जाने के चलन पर गंभीर संज्ञान लिया था।

    उल्लेखनीय है कि सिंगल जज अभी नवाब अली उर्फ ​​नवाबुद्दीन की ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई कर रहे हैं। नवाब अली पर BNS के तहत धोखाधड़ी, जालसाज़ी और आपराधिक साज़िश के आरोप लगाए गए। आरोप है कि उसने एक मृत पॉलिसीधारक की विधवा से 9.6 लाख रुपये की बीमा राशि में से आधा हिस्सा हड़प लिया था।

    हाईकोर्ट के सामने आरोपी ने दावा किया कि समझौते के अनुसार, उसने HDFC Life Insurance Company से स्वास्थ्य बीमा हासिल करने का खर्च उठाया था। इसके बदले में आवेदक ने "लियाज़निंग मनी" (संपर्क शुल्क) लिया था, जो कुल बीमा राशि का आधा हिस्सा था।

    इस बात को ध्यान में रखते हुए बेंच ने HDFC Life के ब्रांच मैनेजर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और यह बताने के लिए बुलाया कि क्या बीमा पॉलिसी जारी करते समय वे प्रोसेसिंग या सर्विस चार्ज के नाम पर कोई रकम लेते हैं।

    उस आदेश के बाद 11 मार्च को ब्रांच मैनेजर हाईकोर्ट के सामने पेश हुए और बताया कि जीवन बीमा पॉलिसी जारी करने के लिए पॉलिसीधारक से प्रोसेसिंग फीस के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।

    दरअसल, HDFC Life Insurance की ओर से पेश वकील ने बेंच को बताया कि पश्चिमी यूपी में एक गैंग सक्रिय है, जो मौत के बिस्तर पर पड़े किसी व्यक्ति की तलाश करने के बाद HDFC Life Insurance Ltd. सहित अलग-अलग बीमा कंपनियों के ज़रिए जीवन बीमा हासिल करने के लिए हेरफेर करता है।

    बेंच को यह भी बताया गया कि कुछ मामलों में तो ऐसा भी हुआ है कि जब जांचकर्ता भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) के लिए गए तो उन्हें गैंग के सदस्यों ने धमकाया भी। यह भी कहा गया कि जहां एक ओर HDFC Life ने इन जाली दस्तावेज़ों और 'डेथबेड पॉलिसी' (मृत्यु-शय्या पर ली गई पॉलिसी) के संबंध में FIR दर्ज कराई। वहीं दूसरी ओर पुलिस निष्पक्ष जाँच करने में सहयोग नहीं कर रही है।

    व्यापक धोखाधड़ी को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने राज्य को निर्देश दिया कि वह इस संबंध में जानकारी प्राप्त करे कि क्या HDFC Life Insurance का कोई जांचकर्ता या कर्मचारी इस वर्तमान मामले या इसी तरह के अन्य घोटालों में सीधे तौर पर शामिल है।

    मामले के गुण-दोषों के संबंध में न्यायालय ने सब-इंस्पेक्टर द्वारा दायर किए गए 'अनुपालन हलफनामे' (Compliance Affidavit) का अवलोकन किया, जिससे यह पता चला कि विधवा को बीमा भुगतान के रूप में मिली राशि में से 4.8 लाख रुपये सीधे आरोपी-आवेदक की पत्नी, श्रीमती रुक्सी अंजुम के खाते में स्थानांतरित कर दिए गए।

    न्यायालय ने यह भी पाया कि विधवा के बैंक खाते से संबंधित विवरण (Bank statement) की जांच करने पर 10,000 रुपये की राशि के ऐसे 49 अन्य संदिग्ध आहरण (Withdrawals) भी सामने आए। राज्य पक्ष ने यह आरोप लगाया कि आवेदक ने विधवा के नाम पर एक SIM कार्ड प्राप्त करके और उसे उसके बैंक खाते से लिंक करके, उस खाते का संचालन किया।

    तथापि, राज्य पक्ष यह स्पष्ट नहीं कर सका कि वे 49 अलग-अलग नकद आहरण (Cash Withdrawals) वास्तव में किसके द्वारा किए गए। परिणामस्वरूप, हाईकोर्ट ने राज्य पक्ष को इस संबंध में विशिष्ट निर्देश प्राप्त करने हेतु समय प्रदान किया कि क्या इन विशिष्ट लेन-देनों के संबंध में विधवा का बयान दर्ज किया गया अथवा नहीं।

    हाईकोर्ट ने इस मामले के 'जांच अधिकारी' (IO) को भी यह निर्देश दिया कि वे सुनवाई की अगली तिथि (25 मार्च) को मामले से संबंधित समस्त प्रासंगिक अभिलेखों (Records) के साथ कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।

    Case title - Nawab Ali @ Nawabuddin vs State of UP

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