'शिक्षा व्यवस्था में धोखाधड़ी': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोचिंग एकेडमी से जुड़े कथित 'डमी स्कूल रैकेट' की जांच का आदेश दिया

  • शिक्षा व्यवस्था में धोखाधड़ी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोचिंग एकेडमी से जुड़े कथित डमी स्कूल रैकेट की जांच का आदेश दिया

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आज़मगढ़ के एक स्कूल और उसी मैनेजमेंट के तहत चल रही कोचिंग एकेडमी के कामकाज की जांच करने का निर्देश दिया। यह जांच इस बात का पता लगाने के लिए की जाएगी कि क्या ये संस्थान कोई ऐसा रैकेट चला रहे हैं जिसमें छात्रों को उनकी जानकारी के बिना किसी "डमी स्कूल" में दाखिला लिया हुआ दिखाया गया।

    जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने पाया कि ये संस्थान NEET, IIT-JEE और CLAT जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए रेजिडेंशियल कोचिंग (रहने-खाने की सुविधा वाली कोचिंग) दे रहे थे, जबकि साथ ही छात्रों को CBSE के तहत किसी दूसरे स्कूल में रजिस्टर्ड दिखाया जा रहा था।

    कोर्ट ने कहा,

    "रिकॉर्ड से यह साफ है कि रेस्पॉन्डेंट नंबर 5 और 6 एक ऐसा रैकेट चला रहे हैं, जिसमें इच्छुक छात्रों को डमी स्कूल में दाखिला दिया जाता है - वह भी उनकी जानकारी के बिना - और साथ ही वे NEET परीक्षा के लिए रेजिडेंशियल कोचिंग भी चला रहे हैं।"

    इसे "शिक्षा व्यवस्था में धोखाधड़ी" बताते हुए, कोर्ट ने राज्य सरकार को आज़मगढ़ के फड़गुड़िया गांव में स्थित हीरा पब्लिक स्कूल और उसी मैनेजमेंट द्वारा चलाई जा रही कथित कोचिंग एकेडमी की जांच करने का निर्देश दिया।

    कोर्ट ने सरकार से स्कूल के मैनेजमेंट की जांच करने और जौनपुर के शहाना इंटरनेशनल स्कूल के साथ उनके कथित संबंध पर रिपोर्ट सौंपने को भी कहा। इस स्कूल में याचिकाकर्ता (अबू हुज़ैफ़ा) को CBSE सिस्टम के तहत 11वीं कक्षा का रजिस्टर्ड छात्र दिखाया गया था, जबकि उसने वहां कभी दाखिला लेने से इनकार किया।

    जांच रिपोर्ट और रेस्पॉन्डेंट नंबर 2 का पर्सनल हलफनामा 2 नवंबर, 2026 तक दाखिल किया जाना चाहिए। संस्थान के प्रिंसिपल और मैनेजर को भी सुनवाई की अगली तारीख पर मौजूद रहने का निर्देश दिया गया।

    कोर्ट अबू हुज़ैफ़ा द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य रेस्पॉन्डेंट के खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

    याचिकाकर्ता के वकील, एडवोकेट मो. कुमेल हैदर ने कहा कि हुज़ैफ़ा कभी भी शहाना इंटरनेशनल स्कूल का छात्र नहीं रहा है। अपने जवाब वाले हलफ़नामे में, उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने स्कूल में एडमिशन के लिए अप्लाई किया, न ही वहां क्लास अटेंड की थीं और न ही कोई फ़ीस भरी थी।

    उन्होंने रेस्पॉन्डेंट्स (जवाब देने वाले पक्ष) द्वारा दिखाए गए CBSE रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए। यह बताया गया कि उसमें एडमिशन एप्लीकेशन, फ़ीस की रसीद, आइडेंटिटी कार्ड, अटेंडेंस रिकॉर्ड या उनके साइन जैसी कोई चीज़ नहीं थी।

    याचिकाकर्ता ने बताया कि वह फड़गुड़िया के एक हॉस्टल में रह रहे थे और 5 जुलाई, 2025 से मार्च 2026 तक किसी दूसरे संस्थान में असेसमेंट (परीक्षाओं) में शामिल हो रहे थे।

    उन्होंने तर्क दिया कि शहाना इंटरनेशनल स्कूल के रिकॉर्ड में एडमिशन की तारीख 12 अगस्त, 2025 दिखाई गई थी, जबकि उस समय तक वह पहले से ही दूसरे संस्थान में असेसमेंट में शामिल हो रहे थे और फ़ीस भर रहे थे।

    रिकॉर्ड की जांच करने के बाद कोर्ट ने पाया कि इससे संकेत मिलता है कि कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम की तैयारी करने वाले छात्र एक संस्थान में कोचिंग ले रहे हो सकते हैं, जबकि उन्हें उनकी जानकारी के बिना किसी दूसरे स्कूल में एडमिट दिखाया जा सकता है।

    इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।

    Case Title : Abu Huzaifa vs. State Of Uttar Pradesh And 5 Others

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