शादियों की जांच और युवा जोड़ों का पीछा कर रही UP Police: हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- परेशान करने वाला चलन
Shahadat
24 April 2026 7:23 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी की कि पुलिस उन युवा जोड़ों के खिलाफ FIR दर्ज करके और उनका पीछा करके बहुत बड़ी गलती कर रही है, जिन्होंने अपनी मर्ज़ी से शादी की है।
पुलिस द्वारा अन्य अपराधों की जांच करने के बजाय आपसी सहमति से हुई शादियों की जांच करने और FIR दर्ज करने के 'परेशान करने वाले चलन' पर चिंता जताते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को ऐसे मामलों में सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
इस निर्देश के साथ बेंच ने याचिकाकर्ता-जोड़े के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की। साथ ही इस बात पर ज़ोर दिया कि किसी भी बालिग व्यक्ति को यह बताने का अधिकार किसी के पास नहीं है कि वह कहां रहेगा या किसके साथ रहेगा, शादी करेगा, या अपनी ज़िंदगी बिताएगा।
कोर्ट ने आगे कहा कि अब देश के हर नागरिक तक यह संदेश जाना चाहिए कि बालिग होने की उम्र का सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही संवैधानिक संस्कृति का भी।
संक्षेप में कहें तो, एक युवा बालिग जोड़े ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। लड़की के पिता द्वारा लड़के के खिलाफ BNS की धारा 87 के तहत दर्ज की गई FIR को चुनौती दी थी। लड़की ने अपनी मर्ज़ी से लड़के से शादी की थी।
हालांकि, लड़की के पिता से 'लापता व्यक्ति' की रिपोर्ट मिलने पर पुलिस ने तुरंत यह FIR दर्ज कर ली और जोड़े का पीछा करना शुरू कर दिया।
मामले के तथ्यों के साथ-साथ उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी और याचिका के साथ पेश किए गए विवाह प्रमाण पत्र पर भी गौर करते हुए बेंच ने टिप्पणी की कि किसी के लापता होने की शिकायत के आधार पर पुलिस को FIR दर्ज नहीं करनी चाहिए थी।
लड़की से बातचीत करने के बाद—जिसने बताया कि वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है—बेंच ने इस FIR को "दोनों याचिकाकर्ताओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर एक गंभीर हमला" करार दिया।

