बांग्लादेशी मानव तस्करी पीड़िता का बयान अब तक क्यों नहीं दर्ज हुआ? बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट से मांगा स्पष्टीकरण

Praveen Mishra

14 March 2026 6:47 PM IST

  • बांग्लादेशी मानव तस्करी पीड़िता का बयान अब तक क्यों नहीं दर्ज हुआ? बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट से मांगा स्पष्टीकरण

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में मुंबई सेशन कोर्ट से यह स्पष्टीकरण मांगा कि मानव तस्करी की शिकार एक बांग्लादेशी महिला का बयान अब तक दर्ज क्यों नहीं किया गया, जबकि कोर्ट ने पहले ही ऐसा करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि पीड़िता को जल्द से जल्द बयान दर्ज कराने के बाद अपने देश बांग्लादेश वापस भेजा जाना है और फिलहाल वह भारत में एक एनजीओ की देखरेख में रह रही है।

    जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की खंडपीठ ने सेशन कोर्ट को निर्देश दिया कि 24 मार्च 2026 तक पीड़िता का बयान और साक्ष्य दर्ज किया जाए, ताकि उसके बाद उसे बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

    11 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान रेस्क्यू फाउंडेशन की ओर से पेश अधिवक्ता एशले कुशर ने अदालत को बताया कि पीड़िता गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही थी। उसके पति द्वारा लिए गए कर्ज के कारण उसे भारत में पार्लर में नौकरी और अच्छे वेतन का लालच दिया गया। वह एक एजेंट की मदद से बिना दस्तावेजों के बांग्लादेश से भारत की सीमा पार कर आई, जिसके बाद उसे अन्य छह लड़कियों के साथ पुलिस ने रेस्क्यू किया।

    कुशर ने बताया कि उन छह लड़कियों में से दो बांग्लादेशी थीं, जिनमें से एक नाबालिग थी जिसे पहले ही बाल कल्याण समिति (CWC) द्वारा बांग्लादेश भेज दिया गया है। अन्य लड़कियों को भी उनके घर भेज दिया गया, लेकिन वर्तमान पीड़िता को “ट्रायल की सफलता” के नाम पर अब तक रोका गया है, जो उचित नहीं है।

    खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि बेहतर जीवन की उम्मीद लेकर भारत आई महिला को एजेंट ने वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर कर दिया। फिलहाल पीड़िता रेस्क्यू फाउंडेशन के शेल्टर में रह रही है, जहां उसकी देखभाल की जा रही है।

    अदालत ने यह भी नोट किया कि 8 अक्टूबर 2025 को एक समन्वय पीठ ने सेशन कोर्ट को पीड़िता का बयान जल्द से जल्द दर्ज करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक ऐसा नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि अक्टूबर 2025 से अब तक बयान दर्ज न किए जाने का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया है।

    इसलिए अदालत ने ग्रेटर मुंबई सेशन कोर्ट के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि वह विस्तृत रिपोर्ट दाखिल कर बताए कि IPC की धारा 370-A और POCSO अधिनियम की धाराओं 16, 17 और 18 से जुड़े इस मामले में पीड़िता का बयान शीघ्र क्यों दर्ज नहीं किया गया। यह रिपोर्ट 24 मार्च 2026 तक अदालत में पेश करनी होगी।

    सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि पीड़िता की तबीयत खराब है और वह फिलहाल मुंबई के कांदिवली स्थित शताब्दी अस्पताल में इलाज करा रही है। उसके पास कोई स्वतंत्र आय का स्रोत नहीं है और उसका इलाज भी रेस्क्यू फाउंडेशन द्वारा कराया जा रहा है।

    अदालत को यह भी बताया गया कि पीड़िता की बांग्लादेश वापसी (रिपैट्रिएशन) की अनुमति पहले केंद्र सरकार ने दे दी थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट द्वारा समय पर आरोप तय न करने और बयान दर्ज न करने के कारण वह अनुमति समाप्त हो गई।

    इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के कारण पीड़िता को अब भी कष्ट झेलना पड़ रहा है, जबकि वह एक गंभीर अपराध की शिकार है।

    अदालत ने सेशन कोर्ट को निर्देश दिया कि 13 मार्च 2026 तक आरोप तय किए जाएं और फरार आरोपियों के मामले को अलग करते हुए गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए। साथ ही, 24 मार्च 2026 तक पीड़िता का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया गया, ताकि उसे बांग्लादेश वापस भेजा जा सके।

    मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

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