कोमा में गए मरीजों के बैंक अकाउंट में जमा पैसों तक उनके आश्रित कैसे पहुंच सकते हैं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र और RBI से कानूनी ढांचे पर मांगा जवाब
Shahadat
20 Oct 2026 2:37 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से जवाब मांगा कि क्या कोमा में गए मरीजों के बैंक खातों में जमा पैसों तक उनके आश्रितों की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए कोई कानून या नियम बनाए जा सकते हैं।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि कोमा में गए व्यक्ति के आश्रित पूरी तरह से असहाय हो जाते हैं, क्योंकि उनके पास अस्पताल के खर्चों को पूरा करने और घर की जरूरतों को संभालने के लिए जरूरी पैसों की कमी हो सकती है।
कोर्ट ने कहा,
"यह वास्तव में चिंता का विषय है कि जब कोई व्यक्ति कोमा में चला जाता है तो उसके आश्रित पूरी तरह से असहाय हो जाते हैं। उनके पास न तो अस्पताल का खर्च उठाने के लिए जरूरी पैसे होते हैं और न ही घर चलाने के लिए कोई आर्थिक साधन।"
कोर्ट ने यह टिप्पणी परवीन जहां द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इस मामले में खाताधारक कोमा में चला गया था और बाद में उसकी मृत्यु हो गई।
कोर्ट ने 'उमा मित्तल और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य' मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के पुराने फैसले को लागू करने पर भी चिंता जताई। उस मामले में केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया कि वह कोमा या 'वेजिटेटिव स्टेट' (अचेत अवस्था) में पड़े व्यक्ति के लिए अभिभावक (गार्जियन) नियुक्त करने के संबंध में उचित कानून बनाए।
कोर्ट ने कहा कि कोमा में गए मरीजों के बैंक खातों में जमा पैसों को उनके आश्रितों को सौंपने के लिए एक व्यवस्था बनाने की जरूरत है। इसके लिए या तो संसद/विधानमंडल द्वारा कोई कानून बनाया जाना चाहिए, या फिर RBI द्वारा बैंकों के लिए कोई दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए।
कोर्ट ने कहा,
"ऐसी परिस्थितियों में सक्षम विधायी निकाय द्वारा कोई कानून बनाया जाना चाहिए, या फिर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को राष्ट्रीयकृत बैंकों और उनकी सहायक इकाइयों के लिए दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। इससे एक ऐसी व्यवस्था बन सकेगी, जिसके जरिए कोमा में गए मरीजों के बैंक खातों में जमा पैसे उनके आश्रितों को मिल सकें।"
अदालत ने केंद्र सरकार और RBI को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने पक्ष रखते हुए हलफनामे (Affidavits) दाखिल करें। इसमें यह भी बताना होगा कि क्या उनके पास ऐसी विशेष परिस्थितियों से निपटने के लिए कोई प्रस्ताव है या उन्होंने कोई दिशानिर्देश तैयार किए हैं, जिनमें तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता होती है।
याचिकाकर्ता को निर्देश दिया गया कि वह RBI को उसके कार्यकारी निदेशक (बैंकिंग विनियमन) के माध्यम से, और भारत संघ (Union of India) को वित्त मंत्रालय के सचिव के माध्यम से प्रतिवादी (Respondents) के रूप में मामले में शामिल करे।
खंडपीठ ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार 'शोभा गोपालकृष्णन बनाम केरल राज्य' मामले में केरल हाईकोर्ट द्वारा तैयार किए गए दिशानिर्देशों को लागू करने पर विचार कर सकती है। इन दिशानिर्देशों का जिक्र 'उमा मित्तल' मामले के फैसले में भी किया गया।
अदालत ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से कहा कि वे राज्य स्तर पर कोई "ठोस और कारगर" समाधान लेकर आएं। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि वे ऐसा कोई समाधान पेश करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होगा।
खंडपीठ ने यह भी चेतावनी दी कि यदि RBI अपने हलफनामे दाखिल नहीं करता है तो अदालत जिम्मेदार अधिकारियों को तलब कर सकती है।
वर्तमान मामले के संबंध में अदालत ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी है कि वह मृतक खाताधारक के बचत बैंक खाते में जमा राशि प्राप्त करने के लिए 'उत्तराधिकार' (Succession) के लिए आवेदन कर सकता है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।

