आयुष मलिक धर्मांतरण केस: हाईकोर्ट द्वारा शामली पुलिस को फटकार लगाने का दावा करने वाली पोस्ट के लिए 6 लोगों पर केस दर्ज
Shahadat
19 Sept 2026 1:35 PM IST

शामली पुलिस ने छह सोशल-मीडिया यूज़र्स (जिनमें एक वकील भी शामिल है) के खिलाफ FIR दर्ज की। इन पर आरोप है कि इन्होंने "गुमराह करने वाली और बिना तथ्यों वाली" जानकारी फैलाई, जिसमें दावा किया गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शामली पुलिस को फटकार लगाई। आयुष मलिक धर्म परिवर्तन से जुड़े एक मामले के केंद्र में हैं।
गौरतलब है कि 16 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 वर्षीय मलिक को आज़ाद किया था। मलिक ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम अपनाया और आरोप लगाया कि इसके बाद उनके पिता ने उन्हें धमकाया और गैर-कानूनी तरीके से कैद करके रखा।
यह FIR 16 सितंबर को सब-इंस्पेक्टर मो. जहांगीर की शिकायत पर कोतवाली शामली पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 353(2) के तहत दर्ज की गई।
FIR में जिन छह लोगों/अकाउंट्स के नाम हैं, वे हैं: करिश्मा अज़ीज़, निखत अली (@INikhatAli), द मुस्लिम (@TheMuslimSphere), वसीम अकरम त्यागी (@WasimAkramTyagi), सैयद कैफ हसन (@kaifsyedhasan) और नदीम सैफी।
FIR के मुताबिक, आरोपी व्यक्तियों (जिनमें वकील सैयद कैफ हसन भी शामिल हैं) ने X और Facebook पर कथित तौर पर ऐसी जानकारी फैलाई, जिसमें कहा गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली पुलिस को "फटकार लगाई"।
FIR में इस जानकारी को "भ्रामक एवं तथ्यहीन" (गुमराह करने वाली और बिना तथ्यों वाली) बताया गया।
पुलिस के बयान के अनुसार, कोर्ट के आदेश के पालन में आयुष मलिक और उनके पिता को इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने पेश किया गया। FIR में खास तौर पर कहा गया कि हाईकोर्ट ने पुलिस से कोई काउंटर-एफिडेविट/जवाब वाला हलफनामा दाखिल करने के लिए नहीं कहा, और पुलिस ने ऐसा कोई हलफनामा दाखिल भी नहीं किया।
FIR में आगे कहा गया कि यह मामला पिता और बेटे के बीच विवाद से जुड़ा था, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश पारित किया।
आरोप है कि हाईकोर्ट के फैसले को "तोड़-मरोड़कर पेश करते हुए" सोशल मीडिया पर गुमराह करने वाली/गलत जानकारी फैलाई जा रही है, जिससे सार्वजनिक शांति पर असर पड़ सकता है। पुलिस का आरोप है कि यह काम BNS की धारा 353(2) के तहत सज़ा-योग्य अपराध है।
FIR में आयुष मलिक केस की पृष्ठभूमि भी बताई गई। पुलिस के अनुसार, 6 जून 2026 को आयुष मलिक के पिता देवराज मलिक ने कोतवाली शामली में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि चांदनी कुरैशी, उसके पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनके बेटे आयुष मलिक का इस्लाम में धर्म परिवर्तन करवा दिया था।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि चांदनी कुरैशी और उसके परिवार के सदस्य आयुष मलिक और उनकी पत्नी को धमका रहे थे। वे उन पर इस्लाम अपनाने और अपनी संपत्ति जबरदस्ती उनके नाम करने का दबाव डाल रहे थे।
शिकायत के आधार पर कोतवाली शामली में BNS की धारा 318(4), 336(3), 338, 61(2), 308(5) और 351(3) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम की धारा 3/5(1) के तहत FIR दर्ज की गई।
चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी को 7 जून को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बाद में, 24 जुलाई 2026 को कैराना में शामली के ज़िला और सेशन जज ने उन्हें ज़मानत दी।
पुलिस FIR में कहा गया कि 9 सितंबर को सुल्तान कारी ने खुद को आयुष मलिक का दोस्त बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने मांग की कि आयुष मलिक को कोर्ट के सामने पेश किया जाए, उनका बयान दर्ज किया जाए और उन्हें अपनी मर्ज़ी से रहने की इजाज़त दी जाए।
FIR में दर्ज है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9 सितंबर के अपने आदेश में शामली के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया कि वे 16 सितंबर को आयुष मलिक को कोर्ट के सामने पेश करें।
इसके बाद 16 सितंबर को आयुष मलिक को इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने पेश किया गया।
पुलिस के प्रेस नोट में कहा गया कि आयुष मलिक और उनके पिता का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक को अपनी इच्छा से कहीं भी जाने और रहने की आज़ादी दी।
पुलिस ने खास तौर पर इस बात से इनकार किया कि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी।
FIR में कहा गया कि पुलिस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए आयुष मलिक और उनके पिता को पेश किया।
इसमें आगे कहा गया:
"माननीय न्यायालय द्वारा पुलिस की ओर से किसी प्रतिशपथपत्र/जवाबी हलफनामे को दाखिल करने की अपेक्षा नहीं की गई तथा न ही पुलिस द्वारा कोई प्रतिशपथपत्र/जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया।"
पुलिस का आरोप है कि हाईकोर्ट के फैसले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और इससे जो जानकारी सामने आई, वह 'झूठी' है और उससे शांति-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है।
शामली पुलिस ने अपने प्रेस नोट में जनता से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर फैली किसी भी जानकारी, पोस्ट या वीडियो को बिना जांचे-परखे सच न मानें और न ही उसे आगे फैलाएं।
पुलिस ने लोगों से कहा कि वे आपराधिक घटनाओं के बारे में गुमराह करने वाली, नकली या बिना तथ्यों वाली पोस्ट से बचें, क्योंकि ऐसी सामग्री से बेवजह भ्रम और अफवाहें फैल सकती हैं।
पुलिस ने जनता को सलाह दी कि किसी भी घटना के बारे में सही और पक्की जानकारी के लिए वे पुलिस या अधिकृत सोशल मीडिया हैंडल से जारी जानकारी पर ही भरोसा करें।

