कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं होने पर HC की नाराजगी, UP DGP ने दिया सुधार का भरोसा
Praveen Mishra
3 Sept 2026 3:51 PM IST

उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच की गुणवत्ता और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों के लगातार अनुपालन न होने को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता जताई। मामले में उत्तर प्रदेश के DGP राजीव कृष्ण 1 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने पेश हुए और भविष्य में पुलिस अधिकारियों द्वारा कोर्ट के आदेशों का समय पर पालन सुनिश्चित करने का भरोसा दिया।
जस्टिस समीर जैन की पीठ एक हत्या के मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इससे पहले कोर्ट ने इंस्वेस्टिगेशन अधिकारियों द्वारा उसके आदेशों का लगातार पालन न किए जाने और खासकर हत्या जैसे गंभीर मामलों में जांच की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई थी।
DGP ने कोर्ट से मांगी माफी
सुनवाई के दौरान DGP राजीव कृष्ण ने हाईकोर्ट के सामने पुलिस की ओर से हुई कमियों के लिए माफी मांगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में “किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा ऐसी गलती नहीं की जाएगी” और हाईकोर्ट के आदेशों का समय पर अनुपालन किया जाएगा।
पीठ ने उम्मीद जताई कि DGP के अधीन अधिकारी आगे से अदालत के आदेशों का पूरी गंभीरता और सावधानी से पालन करेंगे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस की लापरवाही के कारण अदालत का काम प्रभावित नहीं होना चाहिए और उसके आदेशों के अनुपालन न होने से मुकदमे लंबित नहीं रहने चाहिए।
हत्या जैसे गंभीर मामलों की जांच की गुणवत्ता पर सवाल
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से हत्या जैसे जघन्य अपराधों की इंस्वेस्टिगेशन की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई।
इसके जवाब में DGP ने बताया कि इंस्वेस्टिगेशन में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं और पुलिस अधिकारियों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि “बहुत जल्द इंस्वेस्टिगेशन की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा।”
DGP ने यह भी कहा कि जमानत से जुड़े मामलों में आवश्यक निर्देश सरकारी अधिवक्ता के कार्यालय को समय पर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि ऐसी समस्या दोबारा न हो।
मामला क्या था?
मामला पुष्पराज सिंह की जमानत याचिका से जुड़ा था, जिस पर एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने का आरोप था। अभियोजन के अनुसार, आरोपी FIR में नामजद था और उसी ने गोली चलाई थी। मृतक की बहन को घटना का चश्मदीद गवाह बताया गया, जिसने भी आरोपी पर गोली चलाने का आरोप लगाया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक की मौत बंदूक की गोली से लगी चोट के कारण होने की बात सामने आई थी।
हालांकि, आरोपी की ओर से अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाए गए और दावा किया गया कि घटना में उसके पक्ष के तीन लोग भी घायल हुए थे।
CCTV फुटेज ने उठाए सवाल
आरोपी की ओर से पेश किए गए CCTV फुटेज का हवाला देते हुए कहा गया कि फुटेज में मृतक को शाम 7 बजे तक जीवित देखा जा सकता है, जबकि अभियोजन का दावा था कि उसे शाम 6 बजे गोली मारी गई थी।
कोर्ट ने इस विसंगति को नोट किया, लेकिन कहा कि इसका अंतिम मूल्यांकन ट्रायल के दौरान किया जा सकता है।
इसी तरह CCTV में सात बार गोली चलने जैसी घटनाएं/फायर दिखाई देने की दलील दी गई, जबकि अभियोजन ने आरोपी द्वारा केवल एक गोली चलाए जाने की बात कही थी। इस पहलू को भी हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा साक्ष्यों के मूल्यांकन के लिए छोड़ दिया।
वीडियो बयान का भी हवाला
सुनवाई के दौरान मृतक का एक कथित वीडियो बयान भी अदालत के सामने रखा गया, जिसे एक पत्रकार ने रिकॉर्ड किया था। कोर्ट ने नोट किया कि बयान में आरोपी का नाम अन्य आरोपियों के साथ लिया गया था, हालांकि उसमें यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया था कि गोली आरोपी ने ही चलाई।
इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत के स्तर पर प्रथम दृष्टया आरोपी को निर्दोष नहीं माना जा सकता। इसके चलते अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
इस सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच और अदालत के आदेशों के अनुपालन को लेकर DGP की व्यक्तिगत पेशी और उनके आश्वासन ने मामले को खासा महत्वपूर्ण बना दिया।


