हाईकोर्ट ने प्रयागराज में भारी जलभराव का स्वतः संज्ञान लिया, नागरिक सुविधाओं की विफलता पर शीर्ष अधिकारियों को तलब किया
Shahadat
19 Aug 2026 11:02 AM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रयागराज में भारी जलभराव का स्वतः संज्ञान लिया और ज़िला व राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लगातार बारिश के बीच शहर के निचले इलाकों में जलभराव को रोकने के लिए समय पर कदम न उठाने की वजह बताएं।
कोर्ट ने प्रयागराज के ज़िला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त को अपने सामने पेश होने और यह बताने का निर्देश दिया कि शहर, खासकर निचले इलाकों में जलभराव न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए पहले से उपाय क्यों नहीं किए गए।
कोर्ट ने यूपी सरकार के शहरी विकास और योजना विभाग के सचिव को भी व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें लगातार बारिश के कारण होने वाले जलभराव को रोकने के लिए मंज़ूर की गई योजनाओं के बारे में बताया जाए।
ये निर्देश प्रयागराज में जलभराव और नागरिक सुविधाओं की विफलता से जुड़ी दो स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाहियों के तहत दिए गए, क्योंकि शहर के कई हिस्सों में भारी जलभराव की खबरें सुर्खियों में थीं।
'लगातार बारिश के कारण शहर में जलभराव...'
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने इस स्वतः संज्ञान वाले मामले पर सुनवाई की। बेंच ने गौर किया कि "लगातार बारिश के कारण शहर में जलभराव" हो गया, जिससे जजों को कोर्ट पहुंचने में दिक्कत हुई और कोर्ट की कार्यवाही भी देर से शुरू हुई।
बेंच ने प्रयागराज के ज़िला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा कि "शहर, खासकर निचले इलाकों में जलभराव न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए पहले से उपाय क्यों नहीं किए गए"।
शहरी विकास और योजना विभाग के सचिव को भी व्यक्तिगत हलफनामे के ज़रिए यह बताने का निर्देश दिया गया कि भविष्य में शहर को ऐसी समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिए कौन सी योजनाएं मंज़ूर की गईं।
उत्तर प्रदेश के एडवोकेट जनरल और एडिशनल एडवोकेट जनरल को भी अगली तारीख पर कोर्ट की सहायता करने का निर्देश दिया गया। इस मामले की सुनवाई 20 अगस्त, 2026 के लिए तय की गई।
ड्रेनेज मास्टर प्लान और सिविक सुविधाओं की कमी पर स्वतः संज्ञान (suo motu)
इसी मुद्दे से जुड़ी स्वतः संज्ञान कार्यवाही में जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने 'ड्रेनेज मास्टर प्लान' तैयार करने के लिए 20 दिसंबर, 2024 के सरकारी आदेश के तहत बनी पॉलिसी को लागू न करने और प्रयागराज में सिविक सुविधाओं की कथित विफलता का संज्ञान लिया।
यह तब हुआ जब इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कई वकीलों, जिनमें सीनियर वकील प्रभाकर अवस्थी और अमरेंद्र नाथ सिंह शामिल थे, ने सुबह 10 बजे जस्टिस नंदन के सामने प्रयागराज के मौजूदा हालात का ज़िक्र किया।
कोर्ट को बताया गया कि शहर के कई इलाके, जैसे जॉर्ज टाउन, टैगोर टाउन, अल्लापुर, आलोपीबाग, बैरहना, रामबाग और प्रीतम नगर, जलभराव से बुरी तरह प्रभावित थे। बताया गया कि निवासी लगभग "घर में नज़रबंद" थे और सड़कों पर नहीं आ पा रहे थे।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि वकील कोर्ट में पेश नहीं हो पा रहे थे, क्योंकि वे अपने घरों से नहीं निकल सकते थे और उनके क्लर्क भी केस की फाइलें कोर्ट तक लाने के लिए वकीलों के ऑफिस नहीं पहुँच पा रहे थे।
कोर्ट के ध्यान में एक घटना भी लाई गई, जिसमें केस की फाइलें ले जा रहा एक क्लर्क कथित तौर पर अपनी साइकिल से गड्ढों और जलभराव में गिर गया, जिससे ज़्यादातर फाइलें पानी से खराब हो गईं।
कोर्ट ने उसके सामने रखी गई बातों पर ध्यान देते हुए कहा:
"यह कोर्ट मानता है कि यह एक गंभीर मामला है। अगर वकीलों और उनके क्लर्कों को कोर्ट आने से रोका जाता है और केस की फाइलें नष्ट की जाती हैं तो इसका सीधा असर न्याय व्यवस्था पर पड़ता है।"
कोर्ट को यह भी बताया गया कि जलभराव के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट के फोटो एफिडेविट सेंटर तक पहुँचना मुश्किल हो रहा था, जिससे मुक़दमेबाज़ और वकील वहाँ नहीं पहुँच पा रहे थे और ज़रूरी मामलों को फ़ाइल करने में दिक्कतें आ रही थीं।
कोर्ट ने कहा कि यह सिविक अथॉरिटीज़ की विफलता को भी दिखाता है, जिससे न्याय व्यवस्था में बाधा आ रही है।
कोर्ट को बताया गया कि यह समस्या सिर्फ़ बारिश के पानी तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें सीवेज सिस्टम की समस्या भी शामिल थी।
ऑर्डर में दर्ज जानकारी के अनुसार, शहर के जॉर्ज टाउन और टैगोर टाउन में लगभग 3,000-4,000 निवासियों के घरों में सीवेज का पानी (बारिश का पानी नहीं) घुस गया।
कोर्ट ने कहा,
"...यह समझा जा सकता है कि अगर निवासियों के घरों में सीवेज का पानी भर जाए तो यह बहुत अस्वच्छ होता है और इससे कई तरह की बीमारियाँ फैलने जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।"
कोर्ट को यह भी बताया गया कि प्रयागराज में जलभराव की समस्या को हल करने के लिए बनाए गए प्रोजेक्ट्स मंज़ूरी और सैंक्शन न मिलने के कारण सरकारी स्तर पर रुके हुए थे।
यह भी बताया गया कि एम.जी. मार्ग पर ग्रीन बेल्ट के ऊपर "कैचमेंट एरिया" विकसित करने का प्रस्ताव विभागीय स्तर पर मंज़ूर हो गया, लेकिन वह मुख्य सचिव के पास लंबित था। कोर्ट को यह भी बताया गया कि इस प्रोजेक्ट के लिए फ़ंडिंग जारी नहीं की गई।
कोर्ट को जवाहरलाल नेहरू रोड और सी.वाई. चिंतामणि रोड के जंक्शन पर स्थित एक तालाब पर कथित कब्ज़े के बारे में भी जानकारी दी गई, जो पहले कैचमेंट एरिया के तौर पर काम करता था।
दावा किया गया कि कब्ज़े वाली ज़मीन पर एक पेट्रोल पंप चल रहा था और उसके पीछे और भी कब्ज़े हो गए। यह भी आरोप लगाया गया कि नगर निगम ने उस ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया, जो शुरू में एक तालाब थी।
कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में पहले CBI जाँच के आदेश दिए गए और चार्जशीट दाखिल होने के बाद कुछ कब्ज़े करने वालों को दोषी ठहराया गया और जेल भेजा गया। इसके बावजूद, यह बताया गया कि न तो नगर निगम और न ही डेवलपमेंट अथॉरिटी कोई कार्रवाई कर रही थी। इन हालात को देखते हुए जस्टिस नंदन ने स्वतः संज्ञान लिया और रजिस्ट्री को इस मुद्दे पर एक PIL दर्ज करने का निर्देश दिया।
निर्देश दिया गया कि इस मामले को बेंच के गठन और तत्काल सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस, या उनकी अनुपस्थिति में सीनियर जज के समक्ष रखा जाए।


